क्या आप जानते हैं कि भारत से पहले किन-किन देशों में नोटबंदी हुई और उसका क्या असर हुआ?

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जब से मोदी सरकार ने 500-1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया है, पूरे हिंदुस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। हर आदमी नोट बदलने के जुगाड़ में लगा हुआ है। लेकिन, हिंदुस्तान से पहले भी दुनिया के कई देशों ने नोटबंदी का प्रयोग किया। sachjano.com ने जानना चाहा कि दुनिया के दूसरे देश में नोटबंदी का क्या असर हुआ?

  1. नाइजीरिया

nigerian-currency-crisisकरीब 32 साल पहले यानी 1984 में नाइजीरिया में मुहम्मद बुहारी की अगुवाई वाली मिलिट्री हुकूमत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए नए नोट जारी किए। इसका मकसद था कम समय में पुराने नोटो को बाजार से खत्म करना।




नाइजीरिया का यह कदम फ्लॉप साबित हुआ। न महंगाई कम हुई और न ही अर्थव्यवस्था की सेहत में सुधार हुआ। नोटबंदी से नाइजीरिया के लोगों में बुहारी सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा हुआ, उसके बाद बुखारी को तख्तापलट के कारण सत्ता से बेदखल होना पड़ा।

  1. घाना

34 साल पहले घाना ने टैक्स चोरी रोकने के सिए 50 सेडी के नोट रद्द कर दिए। तत्कालीन घाना सरकार ने तर्क दिया कि इससे भ्रष्टाचार पर नकेल लगेगी। लेकिन, सरकार के इस फैसले से घाना का बैंकिंग सिस्टम बहुत कमजोर हो गया।

लोगों ने विदेशी करेंसी की ओर रुख करना शुरू कर दिया। लोगों का अपने ही मुल्क की करेंसी से भरोसा उठ गया, जिससे घाना की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा।




  1. पाकिस्तान

pakistan-noteदिसंबर 2016 से पड़ोसी पाकिस्तान भी अपने पुराने नोट बदल देगा। बदले में नए डिजाइन के नोट जारी किए जाएंगे। पाकिस्तान ने पहले ही इसका ऐलान कर रखा है। इससे पाकिस्तान के लोगों को नोट बदलने के लिए पूरा समय मिलेगा।

पाकिस्तान में जनरल याह्या खान ने दौर में एकाएक सरकार ने 100 और 500 रुपये के नोट रद्द कर दिए। तब पाकिस्तान में बड़े-बड़े अफसरों की तनख्वाह 300-350 हुआ करती थी, इसलिए बैंकों के बाहर ज्यादा लम्बी लाइनें नहीं लगीं।

1970 में पाकिस्तान में सबसे बड़ा नोट 500 का था और आज 5,000 का है। पाकिस्तान में चर्चा है कि अब नवाज शरीफ सरकार 10,000 रुपये का बड़ा नोट लाने वाली है। पाकिस्तान में पिछले 50 साल में नोटों के डिजाइन जरुर बदले, लेकिन नोट दोबारा रद्द नहीं हुए।




  1. जिम्बाब्वे

zimbabwe-trillion_3_cropबात 2006 की है। जिम्बाब्वे पर रॉबर्ट मुगाबे की हुकूमत थी। मुल्क की मुद्रास्फीति 23.1 करोड़ प्रतिशत पहुंच गई। इस दौर में एक मामूली ब्रेड की कीमत 300 अरब हो गई तो वहां की गठबंधन सरकार ने 2006 में सौ ट्रिलियन डॉलर यानी दस खरब जिम्बाब्वे डॉलर का एक नोट निकाला। इस तरह ये नोट दुनिया की सबसे बड़ी राशि वाला नोट बन गया। लेकिन, जब नोटबंदी हुई तो उसके बाद इस भारी-भरकम नोट की कीमत आधा डॉलर रह गयी।

  1. उत्तर कोरिया

6 साल पहले उत्तर कोरिया ने पुरानी करेंसी की कीमत में से दो शून्य हटा दिए। मतलब, 100 रुपये के नोट की वैल्यू एक रुपया रह गयी। किम जोंग-इन ने मुल्क की अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करने और कालाबाजारी पर लगाम के लिए नोट से दो शून्य खत्म किए।

इस दौर में उत्तर कोरिया कृषि और खाद्य संकट का सामना कर रहा था। लेकिन, सरकार को नोट से दो शून्य कम करने के फैसले से उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई।

  1. सोवियत यूनियन

1991 में मिखाइल गोर्बाचेव की अगुवाई में रूस ने कालेधन पर काबू पाने के लिए 50 और 100 रूबल को वापस लिया था। तब रूसी करेंसी में 50-100 रूबल की हिस्सेदारी एक तिहाई से अधिक थी।

गोर्बाचेव के 50-100 के रुबल वापस लेने से महंगाई रोकने में कोई मदद नहीं मिली। रूस की आर्थिक स्थिति बेहद ख़राब हो गयी। गोर्बाचेव को तख्तापलट का भी सामना करना पड़ा और इसके बाद ही सोवियत संघ का पतन हुआ ।




  1. ऑस्ट्रेलिया

australian-currency-1ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है, जिसने प्लास्टिक का नोट जारी किया। इसका मकसद था कागज के नोटों के बदलना। आज की तारीख में ऑस्ट्रेलियाई नोट दुनिया में सबसे बेहतरीन माने जाते हैं, जो न गलते हैं…न फटते हैं। कागज के नोट को बदल कर प्लास्टिक का करने से ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा।

  1. म्यांमार

1987 में म्यांमार की मिलिट्री हुकूमत ने देश की 80 फ़ीसदी करेंसी को रद्द कर दिया। तत्कालीन म्यांमार सरकार ने कालाबाजारी पर काबू करने के लिए कई बड़े और कड़े फैसले लिए थे। जिससे छात्र सड़कों पर उतर आए और भारी विरोध-प्रदर्शन हुआ। म्यांमार सरकार के इस फैसले से मुल्क की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा।







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