एक शानदार हेलीकॉप्टर की बदनाम डील की पूरी कहानी

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वीवीआईपी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में पूर्व वायुसेना प्रमुख शशिन्द्र पाल त्यागी को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। पहली बार देश में किसी पूर्व वायुसेना प्रमुख की गिरफ्तारी हुई है। एस पी त्यागी के साथ उनके भाई संजीव त्यागी और पेशे से वकील और करीबी गौतम खेतान को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया। sachjano.com ने एक शानदार हेलीकॉप्टर की बदनाम डील की पूरी रिसर्च की…

क्या है अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला?

3600 करोड़ रुपये में 12 वीवीआईपी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर का सौदा हुआ। जिसमें से 3 हेलीकॉप्टर हिंदुस्तान पहुंच भी गए। लेकिन,  बाद में पूरी डील का 10 फीसदी हिस्सा रिश्वत के तौर पर देने की बात सामने आई। मामला इटली की अदालत में पहुंच गया।

जिसमें मिडिलमैन क्रिस्टियन मिशेल का नाम भी सामने आया। मिशेल को अगस्टा कंपनी की ओर से करीब 135 करोड़ रुपये दिए गए। कहा गया कि ये पैसा भारत में बतौर रिश्तव अफसरों और नेताओं को दिया गया।

घोटाले की बात कई स्तर पर सामने आने के बाद मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने फरवरी 2013 में VVIP हेलीकॉप्टर डील कैंसिल कर दी। अगस्ता वेस्टलैंड डील के दौरान एयरफोर्स चीफ रहे एसपी त्यागी समेत 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था।

करीब छह महीना पहले इटली की मिलान कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में फैसला सुनाया, 225 पेज के फैसले में से 17 पेज एसपी  त्यागी की भूमिका से भरे पड़े हैं ।

हिंदुस्तान को VVIP हेलीकॉप्टर की जरुरत क्यों पड़ी?

करगिल की जंग के दौरान भारतीय वायु सेना ने महसूस किया कि अब MI-8 VVIP हेलीकॉप्टर से काम नहीं चल सकता है। सियाचीन और टाइगर हिल जैसी ऊंची चोटियों पर रात में भी सुरक्षित पहुंचने लायक हेलीकॉप्टर की जरुरत महसूस की गयी।

जल्द ही VVIP हेलीकॉप्टर की खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई और 2002 में चार वेंडर्स आगे आए। लेकिन, यूरोकॉप्टर EC-225 ही सिर्फ 6000 मीटर ऊंचा उड़ने की कुव्वत रखता था। तब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने सिंगल वेंडर से बचने की सलाह दी।
VVIP हेलीकॉप्टर की उड़ान सीमा को 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर कर दी गयी। कागजी कार्रवाई चलती रही। 2006 में यूपीए वन में 12 VVIP हेलीकॉप्टरों के लिए टेंडर निकले। जिसमें अगस्ता वेस्टलैंड 101, S-92 और रूस का MI-172 आगे आए। लेकिन, रूस जल्द ही इस प्रकिया से बाहर निकल गया। 2008 में हुए फील्ड ट्रायल में एयरफोर्स और एसपीजी ने अगस्ता वेस्टलैंड को अपनी जरुरतों के हिसाब से बेहतर माना।

फील्ड ट्रायल के दो साल बाद अगस्ता वेस्टलैंड के 12 VVIP हेलीकॉप्टर खरीदने की डील तय हुई। इटली से आने वाले महंगे और शानदार हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समते दूसरे VVIP के मूवमेंट के लिए होना था । तीन हेलीकॉप्टर भारत आ भी गए, जो आज भी पालम एयरपोर्ट पर खड़े हैं। इसी बीच सरकार को हेलीकॉप्टर खरीद में घोटाले की भनक लगी और डील कैंसिल कर दी गयी।

कैसे हुआ VVIP घोटाला?
अगस्ता वेस्टलैंड इटली की फिनमैरानिका की सहयोगी कंपनी है, जो एयरोस्पेस के क्षेत्र में दुनिया की दस दिग्जग कंपनियों में शामिल है। इस कंपनी के सीईओ और चेयरमैन रहे जिउसेपे ओरसी दलाली के मामले में जेल में बंद हैं। हिंदुस्तान में अपने हेलीकॉप्टर की डील हासिल करने के लिए ओरसी ने करीबी जेम्स क्रिस्टियन मिशेल को चुना।

चंडीगढ़ की एक कंपनी के डायरेक्टर रहे गियुडो राफ्ल हश्के ने भी बड़ी भूमिका निभाई। हश्के को हिंदुस्तानी रक्षा खरीद प्रक्रिया से लेकर इस सेक्टर की जरुरतों तक के बारे में ज्यादातर छोटी-बड़ी जानकारियां थीं।

घोटाले की आंच एस पी त्यागी तक कैसे पहुंची?

tyagiजब VVIP हेलीकॉप्टरों की मैक्सिमम फ्लाइंग हाइट को 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर किया गया, तब वायुसेना प्रमुख की कुर्सी पर एस पी त्यागी थे। यहीं से उनकी भूमिका शक के दायरे में आ गयी। दरअसल, एस पी त्यागी के तीन करीबी रिश्तेदार संजीव, डोक्सा और संदीप से हश्के के ताल्लुकात थे। त्यागी के तीनों रिश्तेदार कारोबार करते हैं। इन्हीं लोगों की मदद से हश्के तब के एयरचीफ तक पहुंचा।

कहा गया कि हश्के ने AW-101 हेलीकॉप्टरों के तकनीकी पहलुओं पर त्यागी से बात की। उसके बाद ही अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों के भारत में आने का सबसे बड़ा दरवाजा खुला। जिसमें एस पी त्यागी के रिश्ते के भाई और यूरोपीय बिचौलियों के शामिल होने का आरोप लगा। अब सीबीआई की गिरफ्त में पूर्व वायुसेना प्रमुख और उनके रिश्ते के भाई भी हैं।

 

 

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