नेताजी देश का बहुत नुकसान हो रहा है…वीआईपी’गीरी’ छोड़ दीजिए!

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पटना रेलवे स्टेशन पर शाम 7 बजे के आसपास सुरक्षाकर्मियों से घिरे नेता और अफसर अक्सर उस प्लेटफॉर्म पर दिख जाएंगे, जिससे राजधानी एक्सप्रेस गुजरने वाली होगी। एयरपोर्ट के बाहर भी ऐसी ही भीड़ अक्सर आपको दिख जाएगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की जेड प्लस कैटगरी की सुरक्षा वापस ले ली। इसके बाद से वीआईपी कल्चर पर नए सिरे से बहस शुरू हो गयी।

हिंदुस्तान का कोई भी सूबा हो, सुरक्षा की मांग वाली सैकड़ों अर्जियां सरकार के पास पेंडिंग पड़ी रहती है। लेकिन, सवाल ये उठता है कि क्या वाकई हमारे नेताओं को सुरक्षा की जरुरत है? या सिर्फ स्टेटस सिंबल के लिए सुरक्षा की मांग करते हैं, जिससे सरकारी खजाने को मोटा नुकसान होता है।

कितने लोगों को मिला है सुरक्षा कवर?

देश में 20,828 वीआईपी को सुरक्षा मिली है। हर वीआईपी को औसत 3 जवानों का सुरक्षा घेरा दिया गया है। वीआईपी सुरक्षा में सीधे तौर पर 56,944 जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा घेरा के हिसाब से स्थानीय पुलिस का सर्पोट भी मिलता है यानी वीआईपी की सुरक्षा प्रक्रिया में और भी जवान शामिल होते हैं। जबकि, देश में औसत 663 नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा एक पुलिसकर्मी पर है।

वीआईपी कल्चर का नशा

उत्तर और पूर्वी भारत में सरकारी गनर को साथ चलने का नेताओं में एक तरह से शौक है। सरकारी सुरक्षा पाने के लिए तरह-तरह की दलीलें दी जाती है। तिकड़म लगाए जाते हैं।

देश में सबसे ज्यादा वीआईपी कल्चर बिहार में है। यहां 3200 वीआईपी को सुरक्षा मिली हुई है, जिनकी सुरक्षा में 6248 जवान तैनात हैं। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है, जहां 2207 लोगों की सुरक्षा में 4233 जवानों को तैनात किया गया है। जम्मू-कश्मीर में 2075 वीआईपी की सुरक्षा में साढ़े चार हजार जवान लगे हुए हैं।

यूपी में 1901 वीआईपी की सुरक्षा 4681 पुलिसवालों के जिम्मे है। पंजाब में 1852 वीआईपी की सुरक्षा 5300 से ज्यादा जवान कर रहे हैं। दिल्ली में वीआईपी की संख्या कम है। लेकिन, सबसे ज्यादा जवान वीआईपी सुरक्षा लगे हैं। दिल्ली में 489 वीआईपी की सुरक्षा में 7420 जवान और अफसर लगे हैं।

किस सुरक्षा घेरे में कितने जवान?

किसी भी वीआईपी को सुरक्षा उसके ऊपर खतरे को देखते हुए दी जाती है। सुरक्षा किसे दी जाएगी और किसे नहीं…ये तय करने के लिए खास तरीका अपनाया जाता है। जिसमें खुफिया रिपोर्ट सबसे अहम होती है।

खतरे को देखते हुए सुरक्षा घेरा देने का फैसला सरकार करती है। इसमें सबसे अहम जेड प्लस कैटगरी है। इस सुरक्षा घेरे में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इनमें 10 एनएसजी और एसपीजी कमांडो होते हैं और बाकी पुलिस के लोग होते हैं।

दूसरी कैटगरी है- जेड प्लस। इसमें 22 जवान सुरक्षा मुहैया कराते हैं,  जिसमें 5 एनएसजी कमांडो के साथ पुलिस अधिकारी होते है। जैमर और एस्कॉट भी काफिले में शामिल होता है।

वाई श्रेणी की सुरक्षा में वीआईपी को 11 जवानों का सुरक्षा कवच मिलता है। जिसमें 1 या 2 कमांडो और पुलिसकर्मी शामिल होते हैं । वहीं, एक्स कैटेगरी की सुरक्षा में 5 या 2 जवान शामिल होते हैं।

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