ना…ना करते सपा, कांग्रेस और RLD कर बैठेंगे यूपी में गठबंधन !

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यूपी में कांग्रेस के बड़े नेता कह रहे हैं कि किसी से गठबंधन नहीं होगा। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह कह रहे हैं कि कोई गठबंधन नहीं होगा। राष्ट्रीय लोकदल सुप्रीमो अजीत सिंह भी यही कह रहे हैं कि अकेले चुनाव लड़ेंगे। लेकिन, सूबे का सियासी गणित साफ इशारा कर रहा है कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल तीनों के लिए गठबंधन जरुरी है।

मीडिया के सामने गठबंधन के सवाल पर जितनी तेजी से तीनों पार्टियों के नेता ना कह रहे हैं। उतनी ही गर्मजोशी से भीतरखाने गठबंधन की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यूपी विधानसभा चुनाव के लिए तीनों पार्टियों के बीच गठबंधन पर करीब-करीब सहमति बन चुकी है, जिसका दो-तीन दिन में औपचारिक ऐलान हो सकता है।

यूपी में गठबंधन का फॉर्मूला!

सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी कांग्रेस और आरएलडी के लिए 100 सीटें छोड़ने को तैयार हो गयी है। जिसमें से कांग्रेस 78-80 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं, अजीत सिंह की पार्टी के पास 20-22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मौका होगा ।

कांग्रेस और आरएलडी दोनों अभी भी सौदेबाजी के मूड में हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस चुनाव जीतने के बाद सूबे में उप-मुख्यमंत्री का पद भी चाह रही है। 2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 सीटों और आरएलडी ने 9 सीटों पर कब्जा जमाया था।

गठबंधन से किसको फायदा होगा?

यूपी के दंगल की तीनों पार्टियों को अच्छी तरह पता है कि बीजेपी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में अगर मुस्लिम और ओबीसी वोटों को बंटने से रोक दिया जाए तो इसका पूरा फायदा गठबंधन को होगा। लेकिन, अगर मुस्लिम वोट बंट गया तो फायदा सीधे बीजेपी को होगा।

पूर्वांचल में अभी समाजवादी पार्टी मजबूत स्थिति में है। गठबंधन के बाद, कांग्रेस का सवर्ण वोट खासतौर से ब्राह्मण वोट समाजवादी पार्टी को ट्रांसफर होगा तो मुस्लिम वोट भी इधर-उधर नहीं छिटकेगा। कांग्रेस उम्मीदवारों को अखिलेश के काम का फायदा मिलेगा तो सपा के ओबीसी वोट बैंक का एक हिस्सा कांग्रेस के खाते में जा सकता है।

फिलहाल पश्चिमी यूपी में बीएसपी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस, सपा और RLD  के बीच गठबंधन से इलाके के मुसलमान हाथी से साइकिल की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। इलाके का चुनावी ट्रेंड बताता है कि मुस्लिम वोटरों ने हमेशा जीतने वाली पार्टी का साथ दिया। ऐसे मे पश्चिमी यूपी के मुस्लिम वोटरों का साथ गठबंधन उम्मीदवारों को मिल सकता है।

अजीत सिंह का पश्चिमी यूपी के जाट वोटरों पर अच्छा प्रभाव है। गठबंधन में अजीत सिंह के शामिल होने का मतलब है कि जाट वोटरों का गठबंधन को समर्थन। लेकिन, अगर अहम और कड़ी सौदेबाजी की वजह से गठबंधन नहीं हुआ, तो नुकसान तीनों को होगा । जिसका सीधा  फायदा, बीजेपी और बीएसपी को मिलेगा।

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