भारतीय वायुसेना के नए प्लान से पाकिस्तान और चीन का चैन उड़ा..

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भारतीय वायुसेना ने एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों को मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। इंडियन एयरफोर्स अपने लड़ाकू विमानों में एक ऐसी मिसाइल फिट करवा रही है जो पलक झपकते ही दुश्मन का काम तमाम कर देगी। दुश्मन के एयरबेस, कम्युनिकेशन सेंटर और जंगी जहाजों कुछ सेकेंड में ही तबाह कर देगी। भारत ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है जो न चीन के पास है और न ही पाकिस्तान के पास। sachjano.com की रिसर्च

क्या है एयरफोर्स का प्लान?

भारतीय वायुसेना ने अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल फिट करवा रही है। रक्षा सुत्रों के मुताबिक, 2020 तक 40 सुखोई फाइटर प्लेन में ब्रह्मोस मिसाइल  लग जाएगी। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत एकाएक बहुत बढ़ जाएगी। 22 नवंबर को सुखोई-30 से ब्रह्मोस दागने का सफल परीक्षण हुआ था।

निशाने पर पाकिस्तान में हर टारगेट!

रूस में बने सुखोई विमान आज की तारीख में आसमान के सिकंदर हैं। इन विमानों की रफ्तार से लेकर मारक क्षमता पहले से ही अचूक है। हथियारों से लैस सुखोई-30 वगैर जमीन पर उतरे पूरे पाकिस्तान का चक्कर लगाने में सक्षम है। ऐसे में सुखोई में ब्रह्मोस फिट होने के बाद पाकिस्तान के किसी भी इलाके में आसानी से तबाही मचाई जा सकती है।

ब्रह्मोस 300 किलोग्राम तक का एटमी हथियार ले जाने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। सुखोई-30 में फिट ब्रह्मोस की मदद से समंदर में मौजूद दुश्मन के युद्धपोत और पनडुब्बी को आसानी से तबाह किया जा सकता है। पाकिस्तान के कई बड़े एयर बेस और मिलिट्री हेडक्वार्टर को कुछ सेकेंडों में ही नेस्तनाबूत किया जा सकता है।

चीन का चैन उड़ा!

डोकलाम में हिंदुस्तान से चारों खाने चित होने के बाद से ही चीन बौखलाया हुआ है। पूर्वी मोर्चे पर लगातार साजिश रच रहा है। लेकिन, चीन ये भी जानता है कि भारतीय वायुसेना पूर्वी मोर्चे पर पहले से ही बहुत मजबूत स्थिति में है।

सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन पूर्वी मोर्चे पर पहले से तैनात है। इंडियन एयरफोर्स के फाइटर प्लेन पलक झपकते ही चीन के कब्जे वाले तिब्बत के बड़े हिस्से में तबाही मचाने में सक्षम हैं। अब चीन इस बात से परेशान होगा कि जब ब्रह्मोस से लैस सुखोई-30 उसकी सरहद के बिल्कुल करीब होंगे तो क्या होगा?

ब्रह्मोस का तोड़ नहीं

रूस की मदद से तैयार ब्रह्मोस एक ऐसी मिसाइल है, जिसे राडार पकड़ नहीं पाते। मतलब, पाकिस्तान और चीन में मौजूद राडार को ब्रह्मोस की भनक नहीं लगेगी। ब्रह्मोस को जमीन, आसमान और पानी कहीं से भी दुश्मन के ठिकानों पर दागा जा सकता है। माना जाता है कि पाकिस्तान और चीन के पास इस तरह की कोई मिसाइल नहीं है।

दुश्मन के पास कैसी मिसाइल है?

चीन के पास डॉगफेंग-41  मिसाइल है। ये एक इंटर कंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है जो 10 हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है। लेकिन, इसे सिर्फ जमीन से ही दागा जा सकता है। चीन का दावा है कि ये मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इस मिसाइल को अगले साल चीनी सेना में शामिल करने की तैयारी है।

पाकिस्तान ने इस साल जनवरी में बाबर-3 मिसाइल का परीक्षण किया। पाकिस्तानी आर्मी का दावा है कि बाबर-3 का पनडुब्बी से परीक्षण किया गया, जो 450 किलोमीटर तक मार करने में सक्षण है। पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइल को बहुत खतरनाक माना जाता है। क्योंकि, समंदर में छिपी पनडुब्बी की लोकशन पता करना बहुत मुश्किल है।

 

 

 

 

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