राम किशन के बाबा रामदेव बनने की कहानी

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योग गुरु रामदेव। बिजनेस टायकून रामदेव। आज की तारीख में बाबा रामदेव एक ग्लोबल बैंड बन चुके हैं। उनकी जिंदगी पर सीरियल बन रहा है। हिंदुस्तान के घर-घर में पतंजलि के सामान पहुंच रहे हैं। लेकिन, एक गरीब घर में पैदा हुए राम किशन के बाबा रामदेव बनने की कहानी भी बहुत रोचक है।

 

रामदेव का बचपन

बाबा रामदेव का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के सैद अलीपुर गांव में हुआ। उनके पिता का नाम रामनिवास और माता का नाम गुलाब देवी है। जब रामदेव छोटे थे तो उनके गांव में एक योगी आए, उनके संपर्क में आने के बाद रामदेव का मन योग में लगने लगा और उनका रुझान वैदिक शिक्षा की तरफ बढ़ा।

बचपन में रामदेव के पास स्कूल की किताबें खरीदने के भी पैसे नहीं थे, सेकेंड हैंड किताबों से काम चलाया। रामदेव के पास बचपन में चप्पल भी नहीं थी तो टायर काट कर बने चप्पलों से काम चलाया।

जब योगी बने रामदेव

गुरुकुल का जीवन रामदेव को बहुत अच्छा लगने लगा। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पूजा-पाठ करना और भिक्षा मांगने के लिए निकल जाना। एक दिन रामदेव के पिता को इसकी ख़बर लग गयी। भागते हुए पिता खानपुर गुरुकुल पहुंचे और बेटे से घर चलने के लिए कहा। लेकिन, रामदेव ने हाथ जोड़कर पिता के साथ वापस लौटने से मना कर दिया।

 

हरियाणा के खानपुर गुरुकुल में भी रामदेव की मुलाकात बालकृष्ण से हुई। दोनों में दोस्ती हुई। रामदेव को योग शिक्षा से लगाव था तो बालकृष्ण को आयुर्वेद से। गुरुकुल में ही दोनों की जोड़ी जमी और आज तक कायम है।

हरिद्वार से रामदेव की नई शुरूआत

खानपुर गुरुकुल के बाद रामदेव आचार्य बाल कृष्ण के साथ रेवाड़ी के किशनगढ़ गुरुकुल पहुंचे। समय का चक्र आगे बढ़ता रहा। इस दौरान पाणिनी की अष्टाध्यायी पर रामदेव का अधिकार हो चुका था।

गुरुकुल से रामदेव और बालकृष्ण ज्ञान और योग अभ्यास के लिए गंगोत्री पहुंचे। लंबे समय तक साधना की और फिर हरिद्वार पहुंचे। गुरु आचार्य शंकर देव महाराज ने रामदेव को कृपालु बाग आश्रम के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी। आश्रम में रामदेव ने योग सिखाना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे देश भर में लोकप्रिय हो गए।

रामदेव का किस्मत कनेक्शन

रामदेव कभी भाग्य और हाथ की रेखाओं पर भरोसा नहीं करते हैं। उन्होंने कभी मुहूर्त देखकर कोई काम शुरू नहीं किया। शनि-राहु-केतू जैसे ग्रहों का उनके लिए कोई मतलब नहीं। रामदेव की मानें तो वे भाग्यवादी नहीं पुरुषार्थवादी हैं।

रामदेव की दिनचर्या

रामदेव रोजाना 17 से 18 घंटे काम करते हैं। सुबह साढ़े तीन बजे उठते हैं। सबसे पहले 1-2 ग्लास गर्म पानी पीते हैं। थोड़ी देर बाद आंवला और एलोवेरा का जूस पीते हैं। रामदेव सुबह 4 बजे योग शिविर में जाने से पहले आधा घंटा वार्म अप करते हैं।

योग शिविर तक रामदेव दौड़ते हुए पहुंचते हैं। योग करते हैं। इसके बाद सुबह 8 बजे  घंटे भर लोगों से मिलते हैं। रामदेव करीब 9 बजे हल्का नाश्ता करते हैं। इसी दौरान अखबार और मैग्जीन पढ़ते हैं। लंच के बाद फिर लोगों से मिलते हैं।

दोपहर 3 बजे आध्यात्मिक शिविर शुरु होता है, इसमें रामदेव सुबह के मुकाबले कुछ शांत रहते हैं। शाम 7 बजे फिर रामदेव मिलने आए लोगों से बात करते हैं। रात के हल्के भोजन के बाद रामदवे फिर लोगों से मिलते हैं और हर हाल में रात 10 बजे तक सोने चले जाते हैं।

रामदेव ने हाल में खुलासा किया कि वो 7 बार मौत के मुंह से बचे हैं। रामदेव ने जिस तरह से पातंजलि के कारोबार को आगे बढ़ाया है, उस बिजनेस मॉडल पर मैनेजमेंट के छात्र अपने-अपने हिसाब रिसर्च कर रहे हैं।

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