दिल्ली के पार्कों में कर्फ्यू है…सरकार से कुछ मत पूछो..उसे बहुत काम हैं

0
506 views

दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली से भिवानी तक की यात्राओं में व्यस्त हैं, उन्हें भाषण देने हैं, इंडिया गेट पर एक औऱ नए आंदोलन की तैयारी करनी है, टीवी चैनल पर बैन के खिलाफ ट्वीट्स की झड़ी लगानी है, लेकिन जहरीली हवाओं से घिरी राजधानी पर सिर्फ दूसरे राज्यों को कोसना है। देश के प्रधानमंत्री को दिवाली मिलन कार्यक्रम करना है, जापान के दौरे की तैयारी करनी है, उत्तर प्रदेश के राजनीतिक सूरत ए हाल पर चर्चाएं करनी हैं लेकिन रोज धुएं में खो रही राजधानी के बारे कुछ दिखाने के लिए भी करने का वक्त नहीं है। हो सकता है एक दो दिन में कोई नया विज्ञापन आ जाए, एक मन की बात हो जाए औऱ किसी भाषण में ये बता दिया जाए कि हमारी संस्कृति और परंपराएं पूरी दुनिया के पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने के लिए काफी हैं।

smog

(इस पार्क में आजकल मॉर्निंग वॉक बंद है)




पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था..

पिछले साल जब दिल्ली को स्मॉग ने घेरा तब भी हड़कंप मचा था। टीवी चैनलों ने प्रोग्राम दिखाए, बहस की, मंत्रियों के इंटरव्यू  किए। इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मंत्रणा की और 42 बिंदुओं पर काम करने का निर्णय लिया ताकि 2016 में ऐसी धुंध ना फैले। कौन सा काम कब पूरा करना है इसकी लिस्ट बनाई गई। लेकिन सरकारों के पास कई महत्वपूर्ण काम थे इसलिए कोई इन पर ध्यान दे पाया और इस साल हम सब औऱ सबसे ज्यादा हमारे बच्चे इस जहरीले स्मॉग का शिकार बन रहे हैं।




क्या करना था..क्य़ा हुआ?

पिछले साल ये तय हुआ था किसानों को दिवाली के वक्त फसल कटने के बाद पराली जलाने से रोका जाएगा। लेकिन ये नहीं हो पाया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब औऱ राजस्थान में खेतों में जली पराली का धुआं पूरे एनसीआर में इस बार भी फैला। किसानों तक संदेश पहुंचाने में सरकारें नाकाम रहीं। जबकि धुंआ फैलाने पर गिरफ्तारी तक का प्रावधान है।आज कर दिल्ली के पास खेतों से कितना धुआं उठ रहा है ये आप खुद नासा के सेटेलाइट से मिली इस तस्वीर को देख लीजिए-

smog3

दिल्ली औऱ आसपास के इलाकों में पुरानी तकनीक वले ईट के भट्टे बदस्तूर जारी हैं। नई टेक्नॉलॉजी देने की बातें सिर्फ भाषणों में सुनाई दी। कंस्ट्रक्शन के काम में सावधानियां सिर्फ कागजों में बरती गई ज्यादातर साइट्स पर अब भी बगैर कवर किए हुए काम चल रहा है।

इस बार क्या हो रहा है

इस बार दिल्ली सरकार आम लोगों से सेस के जरिये जमा की गई रकम का एक हिस्सा पड़ोसी राज्यों को देने की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल किसानों को मशीनें देने में किया जाएगा जिससे अगले साल ऐसे हालात ना बनें। लेकिन पुराने अनुभवों से लगता नहीं कि ये योजना भी जमीन पर उतर पाएगी।




The short URL of the present article is: http://sachjano.com/KeGbZ