नदी का किनारा बनेगा हवाई अड्डा और धारा बनेगी रनवे…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान में सीप्लेन के पहले पैसेंजर बन गए। उन्होंने अहमदाबाद में साबरमती नदी से धरोई डैम के लिए उड़ान भरी। दरअसल, सीप्लेन का देश में लगातार ट्रायल चल रहा है। इस सेवा के शुरू होने से देश की नदियों और झीलों को रनवे की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे कम खर्च में देश के ज्यादातर छोटे-बड़े शहरों को हवाई सेवा से जोड़ा जा सकेगा।

हवाई सेवा में क्रांति की तैयारी

देश में लोगों को सस्ती हवाई सेवा देनेवाली स्पाइस जेट जापान की एक कंपनी के साथ मिलकर पिछले कुछ महीनों से पानी पर उतरने वाले प्लेन का ट्रायल कर रही है। स्पाइस जेट ने हाल ही में मुंबई की गिरगांव चौपाटी पर सीप्लेन का ट्रायल किया था। भारत में जिस तरह के सीप्लेन का ट्रायल चल रहा है, उसमें 10 से 12 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।

एक अनुमान के मुताबिक, आज की तारीख में एक औसत आकार का हवाई अड्डा बनाने में करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आता है। एयरपोर्ट के रख-रखाव पर भी सरकार को मोटा खर्च करना पड़ता है। इतने पैसे में 12-14 सीटर एंफीबियस कैटगरी के 10 प्लेन आ सकते हैं।

आम आदमी सीप्लेन में कब उड़ेगा?

हिंदुस्तान के 7 हजार किलोमीटर लंबे समुद्र तट से लेकर नदियों और झीलों के पानी को रनवे की तरह इस्तेमाल करने के प्लान पर सरकार बड़ा सोच रही है। देश में ऐसे 106 जलमार्गों की पहचान की गई है, जहां इस सेवा को शुरू किया जा सकता है।

एविएशन सेक्टर से जुड़े लोगों के मुताबिक, स्पाइस जेट 100 से अधिक एंफीफियस कैटगरी के प्लेन खरीदने की तैयारी कर चुकी है। इन विमानों की खरीद पर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्पाइस जेट साल भर के अंदर देश के अलग-अलग हिस्सों में सीप्लेन सर्विस शुरू करने की तैयारी में है।

कैसे काम करता है सीप्लेन?

जापान को सीप्लेन बनाने में महारत हासिल है। वहां, एंफीबियस कैटेगरी के प्लेन पानी और जमीन दोनों पर लैंड और टेकऑफ कराए जा सकते हैं। दरअसल, एंफीबियस कैटेगरी के प्लेन इस तरह से डिजाइन किए गए हैं, जिससे वो आसानी से पानी को रनवे की तरह इस्तेमाल कर लेते हैं।

एंफीबियस कैटगरी के प्लेन को जब पानी पर लैंड करना होता है तो लैंडिंग के समय जहाज के निचले हिस्से के व्हील्स नहीं खुलते। उनकी जगह पर नाव के आकार की चीजे खुलती हैं। इसी के सहारे ये प्लेन पानी पर तैरते हुए उतर जाते हैं। अगर, जमीन पर प्लेन को लैंड करना हो तो सामान्य जहाजों की तरह सिर्फ व्हील्स ही खुलते हैं। इस कैटगरी के कुछ सीप्लेन इस तरह से डिजाइन किए गए हैं, जो सिर्फ कुछ फीट गहरे पानी में ही उतर सकते हैं।

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