सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर बताएगा क्या है हिंदुत्व ?

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सुप्रीम कोर्ट फिर इस सवाल पर विचार कर रहा है कि हिंदुत्व सिर्फ एक धर्म है या फिर एक जीवन शैली। 20 साल पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि हिंदुत्व भारत के लोगों के जिंदगी जीने का तरीका है। तब अदालत के सामने सवाल था कि क्या कोई राजनीतिक दल या नेता चुनाव में हिंदुत्व के नाम पर वोट मांग सकता है? सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने कहा था कि चुनावी भाषणों में हिंदुत्व शब्द के इस्तेमाल को भ्रष्ट तौर तरीकों में शुमार नहीं किया जा सकता।

हिंदुत्व के नाम पर क्यों चला था मुकदमा?
असल में 1987 में शिवसेना के टिकट पर रमेश प्रभु नाम के उम्मीदवार मुंबई की विले पार्ले विधानसभा सीट से उप चुनाव लड़ रहे थे। उस वक्त रमेश प्रभु का प्रचार करते हुए बालठाकरे ने मुस्लिमों को लेकर दो अभद्र टिप्पणियां की थीं। एक और 1990 का था। जब शिवसेना के ही मनोहर जोशी मुंबई की दादर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे। तब मनोहर जोशी के लिए प्रचार करते हुए बीजेपी नेता प्रमोद महाजन ने कहा था कि ‘देश द्रोही मुस्लिम हिंदुत्व की आग में राख हो जाएंगे’ इसके अलावा महाजन ने ये भी कहा था कि ‘हिंदुत्व पर राजीव गांधी का बोलना वैसा ही है जैसे देहव्यापार करने वाली महिला का वफादारी के बारे में बोलना’। इस तरह के मामलों की शिकायत जब बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई तो अदालत ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी समेत शिवसेना और बीजेपी के कई विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी। फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। चुनावी भाषणों के दौरान हिंदुत्व शब्द के इस्तेमाल पर जिरह हुई। इस शब्द की गहराई से विवेचना की गयी। और आखिर में जस्टिस जे एस वर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने रमेश प्रभु की सदस्यता को तो रद्द किया लेकिन मनोहर जोशी की सदस्यता बहाल कर दी।

हिंदुत्व के बारे में क्या कहा जस्टिस वर्मा ने ?
अदालत ने संविधान की धारा 123 (3-A) के हर पहलू को समझा। संविधान के इस हिस्से में चुनावी प्रक्रिया में भ्रष्ट तौर तरीकों को परिभाषित किया गया है। इसके मुताबिक धर्म, रंग, जाति, सम्प्रदाय या भाषा के आधार पर लोगों के बीच ईर्ष्या और दुश्मनी की भावना को जगाना या प्रोत्साहित करना भ्रष्ट तौर तरीके हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी धारा के आधार पर रमेश प्रभु और मनोहर जोशी की सदस्यता रद्द की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने जब हिंदुत्व की भावना को परखा तो पाया कि हिंदुत्व को सिर्फ हिंदू धर्म की पृथाओं से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। ये भारत की एक जीवनशैली भी है। इस परिभाषा ने देश की राजनीति को नया मोड़ दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कैसे बदली देश की राजनीति?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दी गयी हिंदुत्व की परिभाषा ने देश की राजनीति को बदल दिया। बीजेपी और शिवसेना को भारतीय राजनीति में वो जगह मिल गयी जिसके लिए वो बरसों से छटपटा रही थी। इस फैसले का उदाहरण देते हुए बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में हिंदुत्व को शामिल किया। पार्टी ने खुद पर लगने वाले सांप्रदायिकता के आरोपों को गलत बताया । और 20 साल में बीजेपी देश की सबसे ताकतवर पार्टी बनकर राज कर रही है।

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