20 कमांडोज़ की सुरक्षा में अर्णब कहेंगे #NationWantsToKnow?…Y कैटेगरी की सुरक्षा!

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अंग्रेजी न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ के संपादक अर्णब गोस्वामी को सरकार ने Y कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। आईबी के मुताबिक अर्णब को पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से खतरा है। Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलने का मतलब है पत्रकार अर्णब गोस्वामी की सुरक्षा में 24X7 दो पीएसओ समेत 20 जवान तैनात रहेंगे।

किन-किन पत्रकारों को मिली है सुरक्षा?

केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा पाने वाले अर्णब गोस्वामी इकलौते पत्रकार नहीं हैं। ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी को केंद्र सरकार की ओर से X कैटेगरी की सुरक्षा दी गयी है, जो Y कैटेगरी से नीचे होती है। सुधीर चौधरी को नवीन जिंदल के साथ विवाद औऱ खतरे की आशंका के बाद सिक्योरिटी दी गयी है। ज़ी न्यूज़ के संपादक के साथ अब हमेशा एक जवान तैनात रहता है।

क्षेत्रीय चैनल समाचार प्लस के संपादक उमेश कुमार को भी केंद्र सरकार की ओर से Y कैटेगरी जैसा हाईप्रोफाइल सुरक्षा कवच दिया गया है। उमेश कुमार वही पत्रकार हैं जिन्होंने कुछ समय पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन किया था। वैसे उन्हें इस स्टिंग के पहले से ही सुरक्षा मिली हुई है। पंजाब केसरी अखबार के संपादक अश्विनी चोपड़ा को सबसे कड़ा सुरक्षा कवच दिया है- जेड प्लस। तीन दशक पहले अश्विनी चोपड़ा के दादा और पिता की खालिस्तानी आतंकियों ने हत्या कर दी थी, उसके बाद उन्हें यह सुरक्षा कवच दिया गया था।

केंद्र सरकार कैसे देती है सुरक्षा?

किसी भी शख्स को सुरक्षा देने के केंद्र सरकार के नियम बहुत कड़े हैं। सरकार पद और खतरे को देखते हुए सुरक्षा देने का फैसला करती है। कैबिनेट मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जज को पद के आधार पर सुरक्षा दी जाती है। दूसरी कैटेगरी में धमकी और खतरे को देखते हुए आईबी की सिफारिश पर सुरक्षा देना का फैसला लिया जाता है।

फिलहाल, केंद्र सरकार की ओर से 450 लोगों को VVIP सुरक्षा कवच मिला है। जिसमें से 275 को धमकी और खतरे को देखते हुए सुरक्षा दी गयी है। राज्य सरकार की ओर से भी स्पेशल सुरक्षा दी जाती है। राज्य सरकार की ओर से कई पत्रकारों को सुरक्षा कवर दिया गया है।

कैसी होती है सरकार का VVIP सुरक्षा?

केंद्र सरकार की ओर से 4 तरह की सुरक्षा दी जाती है।

  1. जेड प्लस- दो एस्कॉर्ट गाड़ी के साथ 40 कमांडो तैनात किए जाते हैं। इस सुरक्षा चक्र में तैनात कमांडो बिना हथियार के भी दुश्मन से लड़ने में सक्षम होते हैं और अत्याधुनिक एमपी-5 गन से लैस होते हैं। फिलहाल, 55 लोगों को जेड प्लस सिक्यूरिटी कवर मिला है।
  2. जेड कैटेगरी- एक एस्कॉट गाड़ी के साथ 30 जवानों का सुरक्षा चक्र दिया जाता है। इसमें CISF, ITBP, BSF या फिर दिल्ली पुलिस से खास तौर से ट्रेड जवानों को तैनात किया जाता है। फिलहाल, 60 लोगों को जेड कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है।
  3. Y कैटेगरी- 2 PSO समेत 20 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। इस कैटेगरी के सुरक्षा काफिले में पुलिस और पारा-मिलिट्री के जवान शामिल होते हैं। आज की तारीख में 100 से ज्यादा लोगों को Y कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है।
  4. X कैटेगरी- इसमें चार जवानों का सुरक्षा चक्र दिया जाता है। इसमें ज्यादातर राज्य पुलिस के जवान होते हैं। 200 से अधिक लोगों को Y कैटेगरी की सुरक्षा मिली है।

पिछली मनमोहन सिंह सरकार 350 लोगों को वीवीआईपी सुरक्षा मिली थी। अब ये आंकड़ा 450 पर पहुंच गया है। यूपीए शासन में जेड प्लस कैटेगरी में सुरक्षा पाने वाले सिर्फ 20 VVIP थे, जो अब 55 हो गए हैं। एक अनुमान के मुताबिर, वीवीआईपी सुरक्षा में लगे करीब 50 हजार जवानों का खर्च करीब 300 करोड़ रुपये होता है।

जिस तरह से सरकार पत्रकारों को तेजी से VVIP सुरक्षा दे रही है, उससे पत्रकारिता में भी VVIP सिक्यूरिटी लेने होड़ मचने का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि, VVIP सुरक्षा पत्रकारिता में भी स्टेटस सिंबल बनती जा रही है।

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