धुंध और प्रदूषण में चमका एयर प्यूरीफायर का धंधा

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दिल्ली-NCR की हवा इन दिनों इतनी खराब हो गयी है कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। गले में जलन और खरास आम बात हो चुकी है। पार्कों में सन्नाटा पसरा हुआ है। मुश्किल से गिनती के लोग मुंह पर रूमाल या मास्क लगा कर पार्कों में टहलते दिख रहे हैं। लेकिन, प्रदूषण ने एयर प्यूरीफायर के बाजार को गर्म कर दिया है। एकाएक एयर प्यूरीफायर खरीदने वालों की भीड़ बढ़ गयी है।

एयर प्यूरीफायर की मांग बढ़ी

बाजार में कई बड़ी कंपनियों ने अपने एयर प्यूरीफायर उतार दिए हैं, जो 9000 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक में मिल रहे हैं। सभी कंपनियां दावा कर रही हैं कि उनका एयर प्यूरीफायर प्रदूषण से रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों पर एयर प्यूरीफायर की ब्रिकी हफ्ते भर में छह से सात गुना बढ़ी है। मास्क की बिक्री में भी गजब उछाल आया है।

कितना बड़ा है एयर प्यूरीफायर का बाजार?

हाल के कुछ वर्षों से बड़े शहरी क्षेत्रों में गिने-चुने रईसों के घर में एयर प्यूरीफायर लगना शुरू हुआ। एक अनुमान के मुताबिक, हिंदुस्तान में एयर प्यूरीफायर का बाजार अभी बहुत छोटा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2016 में पूरे देश में एयर प्यूरीफायर का बाजार सिर्फ 350 करोड़ रुपये का था। लेकिन, 2020 तक इसके 1500 करोड़ और 2022 तक 2000 करोड़ रुपये से बड़ा बाजार होने का अनुमान है।

कितना फायदेमंद है एयर प्यूरीफायर?

pollution_ncrएयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां दावा करती हैं कि उनका प्रोडक्ट डस्ट, बैक्टीरिया, धुआं और एलर्जीन से हवा को साफ करने में पूरी तरह सक्षम है यानी दिल्ली-NCR के प्रदूषण में भी आप साफ हवा ले सकेंगे।

जानकारों की राय है कि दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI जिस खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, उसमें मास्क और एयर प्यूरीफायर के प्रभाव को लेकर अब तक कोई सटीक मेडिकल डाटा उपलब्ध नहीं है।

कुछ डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि मास्क और एयर प्यूरीफायर इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके प्रदूषण में बहुत कारगर साबित नहीं हो सकते…इसके लिए सरकार और लोगों को मिलकर लॉग टर्म प्लानिंग करनी होगी, जिससे दिल्ली-NCR की हवा को स्वच्छ किया जा सके।

 

 

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