नवाज शरीफ ने जनरल कमर जावेद बाजवा को ही आर्मी चीफ क्यों बनाया?

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लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तान के अगले सेना प्रमुख होंगे। मौजूदा आर्मी चीफ जनरल राहील शरीफ के रिटायरमेंट की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही थी, पाकिस्तान के टॉप लेफ्टिनेंट जनरल के बीच आर्मी चीफ पोस्ट के लिए लॉबिग बड़े पैमाने पर चल रही थी। उसमें, लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा लिस्ट में सबसे नीचे थे। आप भी जानिए कि बाजवा कैसे बने पाकिस्तानी आर्मी में सबसे बड़े बाजीगर?




बाजवा कैसे बने बाजीगर?

gen-bajwaपाकिस्तानी आर्मी में सीनियरिटी के हिसाब से चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात सबसे ऊपर थे। सियासी पार्टियों से उनके ताल्लुकात अच्छे हैं। नवाज शरीफ इसका माइन-प्लस अच्छी तरह जानते हैं।

मुल्तान कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक नदीम आर्मी चीफ की रेस में दूसरे नंबर पर थे। बहालपुर कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक नदीम की भी नजरें गिर्द की तरह आर्मी चीफ की कुर्सी पर लगी थी।

गुजरांवाला कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल इकराम-उल-हक भी जोड़-तोड़ में लगातार लगे थे। उसके बाद नंबर था- पाकिस्तान आर्मी में ट्रेनिंग और इवैल्यूएशन के आईजी लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा का।

पाकिस्तान में जिस तरह से आर्मी चीफ चुने जाते हैं, उसे देखते हुए पहले से ही लग रहा था कि सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात का नंबर नहीं आने वाला। लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक नदीम राहील शरीफ के करीबी समझे जाते थे, उन्होंने ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब में बड़ी भूमिका निभाई। वो बहुत ही ‘ब्लंट’ अफसर समझे जाते हैं। कई बार हाई लेवल मीटिंगों में सरकार को चार बात सुनाते हुए निकल जाते थे। नवाज शरीफ की गुड बुक में इशफाक नदीम नहीं थे। लेकिन, राहील शरीफ की वजह से नवाज शरीफ उन्हें झेल रहे थे।

बहावलपुर और गुजरांवाला के कोर कमांडरों के नाम पर भी कट लगाने में नवाज शरीफ ने ज्यादा देर नहीं लगायी। आर्मी चीफ की रेस में नीचे चल रहे लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा के नाम पर पाकिस्तान के पीएम ने मुहर लगा दी।




जनरल बाजवा में नवाज शरीफ के खास क्या दिखा?

bazwaजनरल बाजवा को आर्मी चीफ चुने जाने की सबसे बड़ी वजह उनका कश्मीर मामलों में अनुभव है। वो आर्मी की कॉर्प-10 की अगुवाई कर चुके हैं, जो PoK और LoC पर एक्टिव है।  भारत के सर्जिकल हमले के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। ऐसे में पाकिस्कतान को ऐसे आर्मी चीफ की जरुरत थी, जो हिंदुस्तान से लगी सरहद के समीकरण को अच्छी तरह से समझता हो और इसमें बाजवा टॉप पर थे।

हाल में बॉर्डर पर पाकिस्तानी आर्मी के जो भी एक्सरसाइज हुए हैं, वो जनरल बाजवा ने ही डिजाइन किए थे। वो बॉर्डर इलाकों का लगातार दौरा भी करते रहे हैं। बलूच रेजीमेंट से ताल्लुक रखने वाले बाजवा गिलगित और बाल्टिस्तान में भी बतौर कमांडर काम कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले भी बाजवा अपनी सेवाएं कांगो में दे चुके हैं।

कहा जाता है कि जनरल कमर जावेद बाजवा को सुर्खियों में रहना पसंद नहीं है। वो चुपचाप काम करने में यकीन करते हैं। शायद, बाजवा का यही तरीका नवाज शरीफ को सबसे ज्यादा पसंद आ गया।

 

 

 

 

 








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