पाकिस्तान में बदलने लगा आतंकी कारखानों का बोर्ड…

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इन दिनों पाकिस्तान की हालत सांप-छुछंदर वाली हो गयी है। प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी और आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ये नहीं तय कर पा रहे हैं कि आतंकी कारखानों को ऊपर चादर कैसे डाली जाए?  क्योंकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ-साफ कह दिया है कि आतंकियों पर बिना ठोस कार्रवाई के पाकिस्तान को फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी। पाकिस्तान को अमेरिका की इस कार्रवाई का पहले से अंदाजा था। इसीलिए, पाकिस्तान में कुछ महीने पहले से ही आतंकी कारखानों को बोर्ड बदलने शुरू हो चुके हैं।

जैश-ए-मोहम्मद का नाम बदला!

भारत में संसद भवन पर हमले से लेकर पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नाम बदल लिया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद का नया नाम अल मुरबितून है। हिंदुस्तान का मोस्टवांटेड मौलाना मसूद अजहर अल मुरबितून नाम के फंड जमा कर रहा है। आतंकियों की नई पलटन की भर्ती कर रहा है।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक अल मुरबितून के बैनर तले मसूद अजहर पाकिस्तान के स्कूलों और कॉलेजों में तरह-तरह की वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है। विजेता को पुरस्कार में तलवार दी जा रही है। पीओके में भी अल मुरबितून सक्रिय है और आतंकियों की नई पलटन तैयार कर रहा है।

भारत मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की वैश्विक लिस्ट में शामिल करना चाहता है। लेकिन, चीन इसमें रोडा अटकाता रहा है। पाकिस्तानी हुक्मरान अच्छी तरह जानते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी कुंडली दुनिया के सामने है। ऐसे में मसूद अजहर के आतंकी कारखाने जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान में बोर्ड बदल गया है।

हाफिज सईद का नया अवतार

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद अपने संगठनों का नाम बदलने में एक्सपर्ट है। हाफिज ने पहले लश्कर-ए-तैयबा बनाया। जब इस आतंकी कारखाने पर प्रतिबंध लगा तो नाम बदल कर जमात-उद-दावा कर दिया। यहां तक की हेडक्वार्टर भी मुरीदके से बदल दिया गया।

लश्कर-ए-तैयबा के काले कारनामों पर चादर डालकर समाजसेवा और चेरिटी का मुलम्मा चढ़ा दिया गया। जमात-उद-दावा की पोल खुलते ही फलाह-ए-इंसानियत का बोई लग गया। लेकिन, बोर्ड बदलने से हाफिज के आतंकी कारखाने का काम नहीं बदला। अमेरिका ने हाफिज सईद के  अब हाफिज सईद मिल्ली मुस्लिम लीग 2018 में पाकिस्तान में होनेवाले आम चुनाव में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर चुकी है।

अब क्या करेगा पाकिस्तान?

2018 में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हाफिज सईद को फिर से नजरबंद किया जा सकता है। दिखावे के लिए हाफिज के कुछ पुराने बोर्ड वाले दफ्तरों को सीज किया जा सकता है, जिससे अमेरिका और दुनिया को दिखाया जा सके कि पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मौलाना मसूद अजहर को भी नजरबंद किया जा सकता है। लेकिन, आतंकी मौलाना का नया संगठन पाकिस्तान में पहले की तरह काम करता रहेगा।

पाकिस्तानी आर्मी हवाला देगी कि अफगानिस्तान सीमा पर उसके जवान किस तरह तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं और भीतरखाने पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई आतंकियों के टॉप कमांडरों को अंडरग्राउंड होने में मदद करेगी, जिससे अमेरिका और दुनिया की आंखों में फिर से धूल झोंका जा सके।

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