कैसे रुका #NDTVIndia का बैन ? कौन चाहता है आजीवन बंद हो जाए #NDTV का हिंदी चैनल?

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सूचना प्रसारण मंत्रालय के फरमान के मुताबिक 9 नवंबर की रात एक बजे से एनडीटीवी इंडिया की स्क्रीन को 24 घंटे के लिए ब्लैक हो जाना था। यानी प्रसारण बंद कर देना था। जनवरी में इस चैनल से सरकार ने पूछा था कि आपको आतंकवादी हमलों के दौरान कवरेज की गाइडलाइंस के उल्लंघन का दोषी क्यों ना ठहराया जाए। जवाब में एनडीटीवी इंडिया ने कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है, जो बातें लाइव कवरेज के दौरान उन्होंने बताई हैं वो पब्लिक डोमेन यानी सभी की जानकारी में हैं औऱ ऐसी ही कवरेज हर किसी टीवी चैनल ने की है, सिर्फ हमें ही अलग से चुन कर नोटिस क्यों दिया गया है। सूचना प्रसारण मंत्रालय की इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी (IMC) इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई औऱ NDTV India को 24 घंटे के लिए बंद करने का फरमान सुना दिया गया।

तो सरकार अपने फैसले से पीछे क्यों हट गई?

NDTV पर बैन का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ। तमाम राजनीतिक दलों के अलावा पत्रकारों के संगठन, ब्रॉडकास्टर्स की संस्थाओं ने सरकार से एनडीटीवी पर लगा बैन तुरंत वापस लेने की मांग की। राजनीतिक दलों ने इस बैन को एमरजेंसी का नाम दे दिया औऱ इस बात का जमकर प्रचार होन लगा कि मोदी सरकार सवाल पूछने वालों का मुंह बंद कर देती है। सोमवार को CWC की बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि इस वक्त लोकतंत्र का सबसे काला दौर चल रहा है।

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सोमवार को ही एनडीटीवी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली औऱ बैन हटाने की मांग की। इसके बाद एनडीटीवी के मालिक प्रणय रॉय ने  सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इस मुलाकात के थोड़ी ही देर बाद एनडीटीवी पर लगे बैन की समीक्षा का फैसला आ गया। यानी फिलहाल एनडीटीवी इंडिया 24 घंटे के लिए बंद नहीं होगा। ये है सरकार का नया ऑर्डर-

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सूचना प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक वेंकैया नायडू से मुलाकात के दौरान प्रणय रॉय ने कहा कि इस मामले में उनका पक्ष ठीक से नहीं सुना गया है। इस दलील के बाद मंत्रालय ने कहा कि फैसले को रीव्यू किया जाएगा तब तक के लिए पुराने आदेश को स्थगित माना जाए। खबर है कि फिलहाल ये कदम फजीहत से बचने के लिए उठाया जा रहा है। 16 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, अगर एक दिन के लिए एनडीटीवी पर बैन लग जाता तो संसद में सरकार के लिए दिक्कतें खड़ी हो  सकती थीं। सरकार के अंदर कुछ लोग मानते हैं कि चैनलों को जो संदेश दिया जाना था वो दिया जा चुका है अब इस मामले को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

उधर एनडीटीवी पर आजीवन बैन की मांग

जहां एक तरफ ज्यादातर मीडिया संगठनों ने एनडीटीवी पर कार्रवाई का विरोध किया वहीं एक राज्य सभा सांसद और ज़ी समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने एनडीटीवी पर आजीवन बैन की मांग कर डाली।

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सुभाष चंद्रा का कहना है कि यूपीए काल में ज़ी पर भी पाबंदी के बादल छाए थे और तब किसी ने उनका साथ नहीं दिया-

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असल में 2012 में ज़ी न्यूज़ पर आरोप लगा था कि उसके संपादक सुधीर चौधरी और समीर आहलूवालिया जिंदल समूह से 100 करोड़ रुपए के विज्ञापन की मांग कर रहे थे। तब इस मामले में इन दोनों संपादकों की गिरफ्तारी भी हुई थी। तब भी चैनल पर कार्रवाई का बात उठी थी लेकिन तब सरकार ने ज़ी न्यूज़ पर की कारर्वाई नहीं की। वैसे ये मामला अब भी अदालत में






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