नौसेना को देसी लड़ाकू विमान तेजस क्यों पसंद नहीं आया?

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इंडियन एयरफोर्स को स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के तेज पर गर्व है। तेजस भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुका है। इसे पाकिस्तान और चीन के स्वदेशी लड़ाकू विमानों से बेहतर माना जाता है। लेकिन, तेजस इंडियन नेवी को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है।

नेवी को क्यों नहीं पसंद आया तेजस?

tejes-1हिंदुस्तान के पहले देसी फाइटर प्लेन तेजस के नेवी वर्जन को नौसेना ने खारिज कर दिया है। नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा का कहना है कि सिंगल इंजल वाला तेजस टैंक फ्यूल भरने और हथियार लोड करने के बाद बहुत भारी हो जाता है।

ज्यादा वजन की वजह से एयरक्राफ्ट कैरियर से तेजस के ऑपरेशन में परेशानियां आ रही हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर से तेजस के टेक ऑफ और लैंडिंग यानी उड़ान भरने और उतारने में दिक्कत आ रही है।

तेजस को INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत पर तैनात करने की योजना थी। फिलहाल, नेवी ने रूस में बने मिग-29 लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर रखा है।

नौसेना अब ऐसे हल्के लड़ाकू विमानों की पहचान करने में लगी है, जो एयरक्राफ्ट कैरियर और नेवी की जरुरतों के हिसाब से फिट बैठते हों।

देसी तेजस का तेज

tejas-in-actionभारतीय वायुसेना में शामिल स्वदेशी लड़ाकू विमान 2200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपने दुश्मन का पीछा कर सकता है। करीब 3000 किलोमीटर तक मार कर सकता है।

तेजस हवा से हवा में और हवा से जमीन पर मिसाइल दागने की कुव्वत रखता है। इससे एंटीशीप मिसाइल, बम और रॉकेट भी आराम से दुश्मन पर बरसाए जा सकते हैं।

वायुसेना की जरुरतों के हिसाब से तेजस हल्का और छरहरा है। इसकी रफ्तार भी तेज है और दुश्मक के लड़ाकू विमानों का पीछा करते हुए ये तेजी से दायें-बायें, ऊपन-नीचे हो सकता है। लेकिन, नौसेना को अपनी जरुरतों के हिसाब से तेजस ओवरवेट यानी भारी लग रहा है।

तेजस कितना स्वदेसी?

तेजस को मेड इन इंडिया बताया जाता है। लेकिन, सच्चाई यही है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी नहीं है। तेजस का इंजन अमेरिकन है। रडार और हथियार प्रणाली इजराइली हैं। इजेक्‍शन सीट ब्रिटेन से आई है। इतना ही नहीं कई अहम कलपुर्जे दूसरे देशों से मंगवाए गए हैं।

 

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