क्या एनडीए से अलग हो जाएगी चंद्रबाबू की पार्टी?

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तेलगुदेशम पार्टी कोटे के दोनों मंत्रियों ने मोदी सरकार से इस्तीफा दे दिया। अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी ने आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जा की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा। फिलहाल, चंद्रबाबू को मनाने की कोशिश जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद चंद्रबाबू को फोन कर चुके हैं।  अब सवाल उठता है कि आखिर टीडीपी इतनी नाराज क्यों हैं? चंद्रबाबू नायडू का अगला रूख क्या होगा?

क्यों नाराज हैं चंद्रबाबू?

टीडीपी बहुत पहले से आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग कर रही है। बजट में भी आंध्र प्रदेश को चंद्रबाबू की उम्मीदों के मुताबिक कुछ खास नहीं मिला।

7 मार्च को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आंध्र सरकार और टीडीपी के सांसदों की राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग पर विचार करने का निर्णय लिया था। उन्होंने विशेष राज्य का दर्जा देने जैसी स्थिति से बचते हुए एक स्पेशल पैकेज का ऐलान किया, जिसे टीडीपी ने ऊंट के मुंह में जीरा करार दिया ।

चंद्रबाबू नायडू ने फौरन पार्टी सांसदों और नेताओं की बैठक बुलाई। पूरा हिसाब लगाने के बाद मीटिंग में मोदी सरकार से अपने दोनों मंत्रियों का इस्तीफा दिलवाने का फैसला हुआ।

नाराजगी की इनसाइड स्टोरी?

भीतरखाने खेल कुछ और भी है। दरअसल,  आंध्रप्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की अगुवाई वाली वाईएसआर कांग्रेस और बीजेपी में नजदीकियां तेजी से बढ़ी हैं।

वाईएसआर कांग्रेस के कई नेताओं ने हाल में बीजेपी के बड़े नेताओं से मुलाकात की। इसे चंद्रबाबू नायडू भीतर ही भीतर बड़े खतरे की तरह ले रहे हैं।

चंद्रबाबू को नई चाल के मायने?

चंद्रबाबू को सियासी हवाओं का रूख पढ़ने और भांपने में महारत हासिल है। उन्होंने अपने मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाकर मोदी सरकार पर दबाव डालना शुरू कर दिया। लेकिन, उन्होंने विकल्पों के दरवाजे और खिड़कियां खोल रखी हैं।

टीडीपी कह रही है कि उसके मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है, NDA से नाता नहीं तोड़ा है। अगर मोदी सरकार अपने रूख से बिल्कुल नहीं हिली तो चंद्रबाबू एनडीए के जहाज से छलांग भी लगा सकते हैं। इसे अगले साल होने वाले आंध्र विधानसभा चुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे।

ऐसे में टीडीपी लोगों से कह सकेगी कि सूबे के विकास के लिए केंद्र से पूरा  सहयोग नहीं मिला। इसलिए, आंध्र के लोगों की बंद किस्मत के दरवाजे नहीं खुल सके। चंद्रबाबू को टीडीपी के लिए वोट मांगने का एक बेहतर मौका मिल जाएगा। अगर, केंद्र से बेहतर सौदेबाजी करने में चंद्रबाबू कामयाब हो गए तो भविष्य के सुनहरे सपने दिखाकर लोगों से वोट मांगेंगे।

अब क्या करेंगे चंद्रबाबू?

चंद्रबाबू की राजनीति को करीब से देखने वालो का मानना है कि मौजूदा सियासी समीकरण में वो एनडीए से अलग होने का जोखिम नहीं लेंगे। क्योंकि, उनके पास फिलहाल NDA से बेहतर विकल्प दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है।

बीजेपी के मिशन 2019 के लिए आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटें अहम हैं। फिलहाल, इसमें से टीडीपी के पास 15, बीजेपी के पास 2 और वाईएसआर कांग्रेस के पास 8 सीट है। मोदी और शाह नहीं चाहते कि टीडीपी एनडीए की छतरी से बाहर हो ।

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