मोदी सरकार का नया कानून MBBS डॉक्टरों को घर बैठा देगा!

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नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब मोदी सरकार की नजर देश के स्वास्थ सेक्टर पर है। देश के सवा अरब लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए सरकार संसद में एक ऐसा बिल पारित करवाने की तैयारी में है, जिससे एमबीबीएस डिग्री वाले मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे यानी सिर्फ एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टर एक तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। मेडिकल में ऊंची डिग्री रखने वालों को ही आसानी से प्रैक्टिस की इजाजत मिलेगी।

क्या है मोदी सरकार का नया प्लान?

आज की तारीख में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद डॉक्टरों को प्रैक्टिस की इजाजत मिलती है। लेकिन, सरकार के प्रस्तावित नेशनल मेडिकल कमिशन बिल के मुताबिक एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टरों को एक और परीक्षा पास करनी होगी, उसके बाद ही प्रैक्टिस की इजाजत मिलेगी।

विदेश में प्रैक्टिस कर चुके डॉक्टरों या विदेशी मेडिकल डिग्री वालों को प्रस्ताविक बिल में परीक्षा से छूट दी गयी है। फिलहाल, विदेशी डॉक्टरों या डिग्री धारकों को हिंदुस्तान में प्रैक्टिस करने से पहले यहां परीक्षा पास करनी पड़ती है।

सरकार के नए बिल का विरोध

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य सरकार के प्रस्तावित बिल का विरोध कर रहे हैं। दलील दी जा रही है कि इससे देश के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस डिग्री लेने वालों की मुश्किलें बढ़ेंगी। दावा ये भी है कि सरकार के प्रस्ताविक बिल से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बिल में जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक रखा गया है। तर्क दिया जा रहा है कि इसमें नेशनल मेडिकल कमिशन के सदस्य अपने करीबियों पर कम और दूसरों पर ज्यादा जुर्माना लगा सकते हैं। मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों का मानना है कि नेशनल मेडिकल कमिशन सरकार के हाथों में कठपुतली की तरह काम करेगा।

भारत में डॉक्टरों की भारी कमी

देश के सवा अरब लोगों के इलाज के लिए सिर्फ 10 लाख एलोपैथिक डॉक्टर मौजूद हैं। इसमें से करीब एक लाख दस हजार डॉक्टर ही सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करते हैं। ग्रामीण इलाकों की करीब 90 करोड़ आबादी का बड़ा हिस्सा काफी हद तक झोला छाप डॉक्टरों पर निर्भर है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में फिलहाल 5 लाख डॉक्टरों की कमी है।

कितने MBBS हर साल निकलते हैं?

भारत में हर साल करीब 50,000 एमबीबीएस डॉक्टर देश के 370 मेडिकल कॉलेज से निकलते हैं। लेकिन, प्रस्तावित बिल के कानून बनने के बाद MBBS डिग्री वालों को प्रैक्टिस की इजाजत लेने के लिए एक और परीक्षा पास करनी होगी यानी डॉक्टरी की राह आसान नहीं होगी।

आज की तारीख में भारत हर साल दुनिया में सबसे ज्यादा डॉक्टर पैदा करने वाला देश है। लेकिन, आबादी की तुलना में सालाना बहुत कम डॉक्टर पैदा होते हैं। इसकी एक बड़ी वजह डॉक्टरी की पढ़ाई में वर्षों लगने वाला समय और लाखों का खर्च भी है।

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