कहां गए 13,860 करोड़ रुपये…महेश शाह जैसे काली कमाई के और कितने किंग?

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सरकार की पहली इनकम डिक्लेरेशन स्कीम के तहत एक कारोबारी ने अपनी 13,860 करोड़ रुपये की बेहिसाब दौलत कबूली। इनकम टैक्स विभाग कागजी खानापूर्ति के बाद टैक्स की पहली किस्त का इंतजार करने लगता है, जो करीब 1560 करोड़ रुपये बैठ रही थी। टैक्स की पहली किस्त नहीं जमा होने पर इनकम टैक्स ने ब्लैकमनी कबूलने वाले कारोबारी की तलाश तेज की और अब वो इनकम टैक्स की गिरफ्त में है।

कहां गए 13,860 करोड़?

अहमदाबाद के कारोबारी महेश शाह ने 13,860 करोड़ रुपये की बेहिसाब दौलत कबूली थी। ये रकम इनकम डिक्लेरेशन स्कीम के तहत घोषित कुल रकम का करीब 20% हिस्सा है। लेकिन, इनकम टैक्स अफसरों ने इतनी बड़ी रकम के बारे में जांच-पड़ताल की शायद कोशिश नहीं की। ये भी जानने की कोशिश नहीं की गई कि इतनी बड़ी दौलत घोषित करनेवाले के पास रकम है भी या नहीं? घोषित रकम किस तरह से कमाई गयी है? कहीं अपराध से जुड़ा पैसा तो नहीं है?

सवाल उठता है  कि क्या इनकम टैक्स विभाग ने महेश शाह द्वारा घोषित अकूत दौलत के बारे गृहमंत्रालय को जानकारी दी। अगर जानकारी दी गयी तो फिर दो महीने तक जांच एजेंसियां कहां सोई हुई थीं?

महेश शाह को जब एक न्यूज़ चैनल के स्टूडियो से शनिवार को पकड़ा गया तो उसने साफ-साफ कहा कि घोषित रकम यानी 13,860 करोड़ रुपया उसका नहीं है। दूसरे लोगों का है। तो क्या महेश शाह ने कमीशन पर दूसरों की काली कमाई को सफेद करने का ठेका लिया था? इनकम टैक्स विभाग जब कागजी खानापूर्ति कर आराम से सो गया तो महेश शाह जैसे कई दूसरों ने भी बेहिसाब काली कमाई को सफेद करने का ठेका लिया होगा?

 

महेश शाह मोहरा या मास्टरमाइंड?

mahesh-shahमहेश शाह ने मीडिया से साफ-साफ कहा कि जो कैश डिक्लेयर किया गया है, वो मेरा नहीं है। ये कैश जिन लोगों का है, उनका नाम इनकम टैक्स विभाग को बताऊंगा। मेरे परिवार की सुरक्षा को खतरा है। सुरक्षा दी जाए। मैंने गलती की है लेकिन गुनहगार या अपराधी नहीं हूं। मेरी कुछ मजबूरी थी इसलिए ये काम किया।

अब सवाल उठता है कि आखिर महेश शाह किसके काले धन को अपने नाम से सफेद कर रहे था? क्या मोटे कमीशन के लिए उसने ने 13,860 करोड़ रुपये बेहिसाब दौलत घोषित की? या फिर नेताओं और अफसरों ने अपने काले धन को सफेद करने के लिए महेश को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया? लेकिन, नोटबंदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

ये भी हो सकता है कि चुनावी मौसम में महेश शाह की जुबान से कुछ ऐसे नेताओं के नाम निकलें, जिससे चुनावी राजनीति पर बड़ा असर पड़े। मतलब, राजनीतिक इस्तेमाल के लिए महेश शाह को मोहरा बनाया गया हो?

कौन है महेश शाह?

महेश शाह की जिंदगी चार कमरों के एक फ्लैट में बीत रही थी। लेकिन, जिंदगी पूरी ऐशो-आराम की जीता था। वो गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रॉपर्टी का कारोबार करते थे। महेश पढ़ा लिखा तो कम था, लेकिन दिमाग से बहुत तेज बताया जाता है।

उसके चार्टर्ड एकाउंटेंट तेहमूल सेठना के मुताबिक महेश शाह अक्सर ऑटो से दफ्तर आया-जाया करता था। उसका एक बेटा बेरोजगार भी है।

 

 

 

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