फिल्म ‘पद्मावत’ पर बवाल मचानेवाली करणी सेना की कहानी

0
201 views

हिंदुस्तान में पहली बार किसी फिल्म पर इतना बवाल हुआ। भय का ऐसा माहौल बन गया है कि लोग संजय लीला भंसाली की पद्मावत की टिकट बुक करवाने से पहले सौ बार सोच रहे हैं। गुरुग्राम में तो पद्मावत का विरोध करनेवालों ने बच्चों की स्कूल बस तक को नहीं छोड़ा। पद्मावत का सबसे मुखर विरोध करणी सेना कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि करणी सेना क्या है? इससे कौन लोग जुड़े हैं? sachjano.com की पूरी रिसर्च।

कैसे बनी करणी सेना?

बात 90 के दशक की है। आरक्षण की राजनीति में राजपूत हाशिए पर आ गए। जाटों का प्रभुत्व धीरे-धीरे बढ़ने लगा। बीजेपी ने भैरोसिंह शेखावत को उपराष्ट्रपति बनाकर दिल्ली भेज दिया तो जाट राजघराने की महारानी और राजपूत की बेटी का नारा देकर वसुंधरा राजे को नेता बना दिया। राजस्थान में राजपूतों की तादाद करीब 12 फीसदी है।

राजपूतों के एक छतरी के नीचे लाने के लिए बीजेपी नेता देवी सिंह भाटी और लोकेंद्र सिंह कालवी ने ऊंची जातियों को आरक्षण और पिछड़ों को संरक्षण देने के नाम पर राजस्थान में सामाजिक न्याय मंच की नींव रखी। इस मंच के बैनर तले बड़ी-बड़ी रैलियां होने लगी। इस संगठन से सूबे के बेरोजगार राजपूत युवा तेजी से जुड़ने लगे। पार्टी बनाकर राजपूतों ने चुनाव लड़ा। सिर्फ देवी सिंह भाटी ही चुनाव जीत पाए और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए।

सामाजिक न्याय मंच के फेल होने के बाद राजपूतों के आरक्षण दिलाने के नाम पर 2006 में करणी सेना का गठन हुआ। करणी माता की जोधपुर और बीकानेर के शाही परिवारों में पूजा की जाती है। करणी माता उर्फ नारी बाई महिला योद्धा थी, जिन्हें उनके समर्थक मां दुर्गा का अवतार मानते हैं।

करणी सेना के कमांडर

सामाजिक न्याय मंच की रैलियों में बड़ा चेहरा रहे लोकेंद्र सिंह कालवी करणी सेना के संयोजक बनाए गए। अजीत सिंह मामडोली के प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इस सेना के गठन का मकसद बताया गया राजपूत समुदाय को एकजुट करना।

करणी सेना से जुड़े नेताओं की भीतरखाने राजनीतिक महत्वाकांक्षा उफान मारने लगी। कहा जाता है कि कांग्रेस को समर्थन देने के नाम पर लोकेंद्र सिंह कालवी और अजित सिंह ममदोली में फूट पड़ गयी और दोनों के रास्ते अलग हो गए।

कौन हैं लोकेंद्र सिंह कालवी?

आज की तारीख में करणी सेना का बड़ा चेहरा लोकेंद्र सिंह कालवी स्वर्गीय कल्याण सिंह कालवी के बेटे हैं। कल्याण सिंह कालवी राजस्थान की शेखावत सरकार में मंत्री और केंद्र की चंद्रशेखर सरकार में भी मंत्री जैसे पद पर चुके थे।

जूनियर कालवी ने एक बार बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन, चुनाव नहीं जीत सके। कांग्रेस के बाद वो बहुजन समाज पार्टी से भी जुड़े। लेकिन, तमाम कोशिश के बाद भी जूनियर कालवी का करियर सियासत में चमकदार नहीं बन पा रहा था।

करणी सेना में कितने गुट?

आज की तारीख में करणी सेना में तीन गुट हैं। श्री राजपूत करणी सेना, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और श्री राजपूत करणी सेना समिति। तीनों ही गुटों में वर्चस्व के लिए कड़ी होड़ रही है। लेकिन, पद्मवती के विरोध के मुद्दे पर करणी सेना के तीनों गुट एक साथ खड़े हैं।

पहले कब सुर्खियों में रही करणी सेना?

2008 में आशुतोष गवारिकर की फिल्म जोधा अकबर का भी करणी सेना ने विरोध किया। इस सेना से जुड़े लोगों का आरोप था कि जोधपुर की राजकुमारी जोधाबाई की अकबर के शादी नहीं हुई थी। मतलब, फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ की गयी है। करणी सेना के विरोध की वजह से राजस्थान में फिल्म रिलीज नहीं हुई। टीवी सीरियल जोधा अकबर का भी करणी सेना ने कड़ा विरोध किया।

करणी सेना खुद को राजनीतिक संगठन नहीं कहती है। लेकिन, अपनी ताकत का एहसास सियासी दलों को लगातार करवाने में जुटी है। ऐसे में राजपूत वोटबैंक को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही करणी सेना के मसले पर एक-एक कदम बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ा रही हैं।

 

 

 

The short URL of the present article is: http://sachjano.com/LXh1X