एक थीं जयललिता..छोटी अम्मो के तमिलनाडु की अम्मा बनने तक की पूरी कहानी

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75 दिनों से अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहीं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का देर रात निधन हो गया। चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बीच में उनकी तबीयत सुधरी थी। लेकिन, कार्डियक अरेस्ट के बाद रविवार से उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। जयललिता ने रात 11.30 बजे आखिरी सांस ली। पूरे तमिलनाडु में शोक की लहर दौड़ गयी। 67 साल की जे जयललिता ने जिंदगी में हर रोल को बड़ी शिद्दत से निभाया और उसमें सुपर हिट रहीं।

छोटी अम्मो से साउथ फिल्मों की सुपर स्टार तक

jayalalithaa-5जयललिता का जन्म मैसूर के मांड्या के एक तमिल ब्राह्मण परिवार में 24 फरवरी 1948 को हुआ था। जब वो सिर्फ दो साल की थीं, तभी पिता चल बसे। मां के कंधों पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गयी। मां वेदवल्ली ने संध्या नाम से तमिल फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। संध्या नन्हीं जयललिता को प्यार से अम्मो कहा करती थी।




अम्मो अपनी मौसी और नाना-नानी के पास बेंगलुरू में रहकर पढ़ाई करने लगीं। बाद में वापस अपनी मां के पास चेन्नई आ गईं। अम्मो पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं। मैट्रिक में उनकी पूरे सूबे में सेकेंड रैंक आई। वो एक बड़ा वकील बनने का ख्वाब सजोए हुए थीं। लेकिन, मां संध्या चाहती थीं कि उनकी बेटी फिल्मों में काम करे।

jayalalithaa-2अम्मो ने 13 साल की उम्र में बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम शुरू किया। उनकी पहली फिल्म ‘एपिसल’ थी। उसके बाद 16 साल की उम्र में वेन्नीरा अदाई नाम की तमिल फिल्म में विधवा का किरदार निभाया।

jayalalitha-3जयललिता ने अपने दौर के सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया। लेकिन, उनकी सबसे हिट जोड़ी एमजीआर के साथ रही। दोनों की उम्र में करीब 30 साल से अधिक का फासला था। जयललिता ने उस दौर के हिसाब के काफी बोल्ड सीन दिए थे। वो स्कर्ट पहन कर डांस करने वाली साउथ फिल्मों की पहली हीरोइन बनीं। जयललिता ने करीब 125 फिल्मों में काम किया।




सिल्वर स्क्रिन से सियासत तक

34 साल की उम्र में जयललिता ने AIADMK में शामिल हुई। 1983 में उन्हें पार्टी ने प्रोपोगेंडा सेक्रेटरी बनाया। पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गयी। अगले साथ उन्हें राज्यसभा भेज दिया गया। 1987 में एमजीआर की मौत के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गयी।

जयललिता के राजनीतिक दुश्मनों ने एमजीआर की पत्नी जानकी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया। 1989 के चुनाव में AIADMK की हार हुई। जयललिता तमिलनाडु विधानसभा में नेता विपक्ष बनीं। इसी दौर में उनके साथ विधानसभा के भीतर बदसलूकी हुई और उन्होंने प्रण लिया कि अब वो मुख्यमंत्री के तौर पर ही इसमें कदम रखेंगी।

cm_jayalalitha-41991 विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी को बहुमत मिला और वो पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। इसमें फंड जुटाने से लेकर प्रचार तक की जिम्मेदारी जयललिता की करीबी शशिकला ने उठा रखी थी। 1996 तक जयललिता के ज्यादातर राजनीतिक फैसले शशिकला लिया करती थीं। लेकिन, दोनों के रिश्तों में तल्खी आने लगी। उन पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगा। जेल तक जाना पड़ा। जयललिता ने 6 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

अम्मो कैसे बनी अम्मा?

amma-canteenजयललिता ने हमेशा जन-कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनका सीधा फायदा मिले। जयललिता ने लोगों के लिए नमक से लेकर सिनेमा तक कम दाम में दिलाने का काम किया।  उन्होंने गरीबों को सस्ता खाना दिलाने के लिए पूरे राज्य में अम्मा कैंटीन शुरू की। वो एक मां की तरह अपने सूबे के लोगों का ध्यान रखने की बात करती थीं।

इस साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जयललिता ने खुद को अम्मा की तरह पेश किया, जो अपनी औलाद यानी जनता का दर्द अच्छी तरह समझ सकती हैं। उन्होंने चुनावी रैलियों में लोगों को मुफ्त मोबाइल फोन और 100 यूनिट बिजली फ्री देने का वादा किया। लड़कियों के लिए स्कूटी खरीदने की लिए 50 फीसदी छूट और हर गरीब घर से एक को नौकरी देने की बात कही। अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं की वजह वो एक अम्मा के तौर पर तमिलनाडु के लोगों के दिलों में लंबे समय तक जिंदा रहेंगी।







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