नोटबंदी से कमाई का आखिरी रास्ता…मोदी सरकार का 103 दिन में 2 लाख करोड़ रुपए बाहर निकालने का मिशन..

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बैंकों में 30 दिसंबर तक 500 और 1000 के पुराने नोट जमा होंगे। पुराने नोट जमा करने की रफ्तार कम हुई है लेकिन रुकी नहीं है। 15 दिन पहले ही देश के राजस्व सचिव ये आशंका जता चुके हैं कि 500-1000 के सारे पुराने नोट बैंकों में जमा हो जाएंगे। यानी नोटबंदी से कमाई का जो सपना सरकार ने देखा था वो पूरा नहीं होने वाला है। लेकिन अब सरकार का कहना है कि कमाई तो होगी, दूसरे तरीके से होगी। इकॉनमी से जुड़े मंत्रियों और अफसरों के मुताबिक पाई-पाई पर टैक्स का हिसाब लगेगा औऱ सरकारी खजाने को भरा जाएगा। लेकिन टैक्स लगाने की प्रक्रिया आसान नहीं है। इसमें लंबा वक्त लग सकता है। इसलिए पूरे सरकारी अमले ने अब जोर लगा दिया है ब्लैक मनी को घोषित कर व्हाइट बनाने वाली स्कीम को कामयाब बनाने पर।




ब्लैक एंड व्हाइट स्कीम !

सरकार का कहना है कि 17 दिसंबर से 31 मार्च तक काली दौलत को सफेद करने का आखिरी मौका है। अपना कालाधन घोषित करिये उस पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा औऱ 25 फीसदी रकम चार साल तक खाते में फ्रीज हो जाएगी। इस तरह से करीब 60 फीसदी पैनाल्टी देकर कालाधन सफेद किया जा सकता है। सरकार ने इस योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपए की संपत्ती को घोषित करवाने का टार्गेट रखा है। अगर 2 लाख करोड़ का कालाधन सफेद किया गया तो इसमें से एक लाख करोड़ रुपए सीधे सरकार के हो जाएंगे। इसके अलावा 25 हजार करोड़ रुपए चार साल के लिए सरकार को मिल जाएंगे जिसका इस्तेमाल गरीबों के कल्याण के कामों में किया जा सकता है।


…लेकिन दो लाख करोड़ रुपए आ पाएंगे?

30 सितंबर को खत्म हुई इनकम डिस्क्लोजर स्कीम में कुल 67 हजार 382 करोड़ रुपए घोषित किए गये। लेकिन वित्त मंत्रालय के मुताबिक असली घोषित रकम 60 हजार 500 करोड़ रुपए के आसपास निकलेगी। तो क्या नई स्कीम में पुरानी योजना के मुकाबले एक लाख चालीस हजार करोड़ रुपए ज्यादा घोषित हो पाएंगे?  टैक्स अफसरों को उम्मीद है कि इस बार भय की वजह से ज्याद कालाधन बाहर आएगा। अगर किसी के पास काला धन है तो वो हर सूरत में उसे व्हाइट करना चाहेगा औऱ सरकारी येजना के तहत पैसा सफेद करने में हमेशा का सिरदर्द दूर होगा। और अगर उसने ऐसा नहीं किया तो आने वाले समय में उसकी मुश्किलें बहुत बढ़ सकती है। इस स्कीम के तहत काला धन घोषित करने वालों का नाम गोपनीय रखा जाएगा और उनके उपर कोई केस भी नहीं चलेगा। स्कीम शुरू करने से पहले देश के राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने तमाम टैक्स अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की औऱ उन्हें बताया कि इस स्कीम को कामयाब बनाना है। यानी टैक्स अफसरों को ज्यादा से ज्यादा रकम घोषित करवाने का टार्गेट दिया जा चुका है।
revenue-department
इतना सक्रिय क्यों है राजस्व विभाग?

काला धन सफेद करने वाली ये स्कीम अगर कामयाब नहीं हुई तो सरकार के लिए बहुत बड़ी फजीहत हो सकती है। नोटबंदी की कीमत बढ़ती जा रही है, अगर इसके  बदले कालाधन सरकारी खजाने में नहीं आया तो सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। 8 नवंबर के बाद पड़े तमाम छापों में 15 दिसंबर तक सिर्फ 316 करोड़ कैश बरामद हुआ था। इसमें से नई करेंसी 80 करोड़ रुपए की थी। इसके अलावा अलग अलग इनकम टैक्स के सर्वे में 2600 करोड़ रुपए की अघोषित आय के बारे में पता चला है। जिस तरह से ताबड़तोड़ छापे पर पड़ रहे हैं उस हिसाब से या आंकड़ा उम्मीद से कम है। अब सरकार के पास 31 मार्च तक का समय है जिसमें उसे 2 लाख करोड़ का टार्गेट पूरा करना है।

 

 







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