चाइनीज सामान का #Boycott: नुकसान चीन का या चांदनी चौक का? #SachJano

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हर दिन मोबाइल पर चीनी सामान का बहिष्कार करने के मैसेज आ रहे हैं। चीनी सामान के विरोधी इस बहिष्कार की शुरुआत दीवाली से ही करना चाहते हैं। लेकिन क्या ‘’कम चीनी’’ वाली दीवाली से चीन को चोट पहुंचेगी? क्या चीन इतना परेशान हो जाएगा कि मौलाना मसूद अजहर को आतंकवादी मान लेगा? ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाने से पहले सौ बार सोचेगा? एनएसजी में भारत के एंट्री का कभी विरोध नहीं कर पाएगा? इन सवालों का जवाब हां या ना में देना मुमकिन नहीं है। लेकिन #SachJano इस मामले से जुड़े कुछ तथ्य यहां रख रहा है।

दीवाली में चीनी सामान के बॉयकॉट से कितना नुकसान?

देश भर के बाजारों में दीवाली के लिए चीनी सामान आना जून जुलाई से शुरू हो जाता है। देश के अलग अलग कोने से कई व्यापारी चीन भी जाते हैं और दीवाली के सामान की बड़ी बड़ी डील करके आते हैं। ऑर्डर के हिसाब से कई चीनी कंपनियां भारत के लिए स्पेशल सामान बनाती हैं। यहीं वजह है कि हर साल दीवाली के मौके पर नए नए तरह के चीनी सामान बाजार में मिलते हैं। इस बार भी यही हो हुआ है। Confederation of All India Traders (CAIT) के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक इस दीवाली के लिए पहले चीनी सामान मंगवाया जा चुका है। दो तीन महीने पहले से ही इम्पोर्टर्स भारतीय बाजारों के लिए सामान मंगवा चुके हैं। कैट के अध्यक्ष बी सी भरतिया के मुताबिक इस दीववाली सीजन में बहिष्कार से नुकसान चीन का नहीं व्यापारियों का होगा।

भारत सरकार क्या कर रही है?

गोवा में ब्रिक्स की बैठक के वक्त ऐसा ही सवाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में कुछ भी नहीं कहना है। उन्होंने कहा -‘सबसे पहले मैं यह बताना चाहता हूं कि चीन के उत्पादों के बहिष्कार के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। ब्रिक्स एक ऐसा समूह है जो आर्थिक मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था और अब यह वैश्विक एवं राजनीतिक मसलों पर चर्चा करता है। हम उम्मीद करते हैं कि जब ब्रिक्स की बैठक होगी, आर्थिक मसलों पर चर्चा की जाएगी और व्यापार एवं सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जाएगी।’ यानी बहिष्कार सोशल मीडिया और मीडिया में ज्यादा है, सरकार आपसी व्यापार को और बढ़ाने की कोशिश में है।

तो फिर चीन को सबक कैसे सिखाएंगे ?

एनएसजी में चीन ने जब भारत के दरवाजे बंद किए थे तब भी ये मांग उठी थी कि हमें चीनी सामान का बहिष्कार कर देना चाहिए। लेकिन कुछ दिनों में ही आवाज ठंडी पड़ गयी। ये वही वक्त था जब भारतीय व्यापारी दीवाली के लिए चीन से सामान मंगवा रहे थे। अगर उस वक्त चीनी सामान का बहिष्कार जोर पकड़ता तो इस दीवाली में बाजारों में चीनी सामान कम नजर आता। प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक यदि लोगों ने ठान लिया है कि चीनी सामान का उपयोग नहीं करेंगे तो उपभोक्ताओं को बेहद मजबूती से सामने आना पड़ेगा जिससे इसके बाद क्रिसमस औऱ नए साल के सीजन के लिए चीन से इम्पोर्ट रोकने पर फैसला हो पाएगा और चीन को बड़ा झटका लगेगा।

क्या बिजली का माला, दीये और मोमबत्तियों का बहिष्कार काफी है?

ट्रेडर्स के मुताबिक इस बार पिछले साल के मुकाबले दीवाली में इस्तेमाल होने वाले चीनी सामान की डिमांड में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। लेकिन ये सामान भारत में चीनी निवेष का बेहद छोटा हिस्सा है। चीन का ज्यादा पैसा मैन्युफेक्चरिंग सैक्टर में लगा है। अलग अलग चीजों के लिए रॉ मटीरियल चीन से आता है। इंजीनियरिंग प्रोडक्ट बड़ी मात्रा में चीन से आयात होते हैं। प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि अगर हमें चीनी सामान का उपयोग बंद करना है तो पहले उनके विकल्प उपलब्ध कराने होंगे जिससे चीनी सामान पर निर्भरता कम हो सके।

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