हाफिज सईद पर क्यों शिकंजा कस रहा है पाकिस्तान?

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पाकिस्तानी हुकूमत ने लश्कर-ए-तैयाबा सुप्रीमो हाफिज सईद पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की खाकन सरकार अमेरिकी दबाव में हाफिज के संगठनों पर सरकारी ताला जड़ने के लिए मजबूर हुई है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, हाफिज सईद के 300 मदरसों और अस्पतालों को खाकन सरकार अपने कब्जे में लेने का मन बना चुकी है।

हाफिज पर पाकिस्तान का चाबुक?

पाकिस्तान सरकार हाफिज सईद से जुड़े चैरिटी संगठनों मसलन मदरसा और अस्पतालों को अपने कब्जे में लेने वाली है। पाकिस्तान में हाफिज के 300 से ज्यादा चैरिटी संस्थान चलते हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। हाफिज के संगठनों की संपत्ति अरबों में है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, 19 दिसंबर के जारी खाकन सरकार के एक आदेश में मुल्क के सभी प्रांतों की सरकारों से हाफिज से जुड़े संगठनों की संपत्ति जब्त करने के लिए कहा गया है।

हाफिज पर क्यों हो रही है कार्रवाई?

पाकिस्तान में इस साल आम चुनाव होने हैं। हाफिज पहले ही हर सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर चुका है। इसके लिए उसने मिल्ली मुस्लिम लीग नाम से एक पार्टी भी बनाई है। लेकिन, पाकिस्तान के चुनाव आयोग से मिल्ली मुस्लिम लीग को रजिस्टर कराने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पायी है।

हाफिज सईद का सबसे ज्यादा प्रभाव पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। इसी इलाके में सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन का भी दबदबा है। हाफिज पंजाब में पीएमएन-एल को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है, जिसका टेस्ट आतंकियों ने नवाज शरीफ की सदस्यता खत्म होने के बाद हुई लाहौर सीट पर हुए उप-चुनाव पर किया।

शाहिद खाकन अब्बासी और नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ नहीं चाहते कि किसी कीमत पर हाफिज की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग के उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरें। क्योंकि, इसका सीधा नुकसान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन को होगा।

खाकन सरकार हाफिज के संगठनों पर शिकंजा कस कर उसे चुनावी अखाड़े से दूर रखने के प्लान पर काम कर रही है, जिससे अमेरिका की पाकिस्तान से नाराजगी थोड़ी कम हो और आम चुनाव में पीएमएल-एऩ की राह आसान हो…

क्या पाकिस्तानी फौज हाफिज के साथ है?

सूत्रों के मुताबिक, हाफिज पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तानी फौज बंटी हुई है। पाकिस्तान के टॉप कमांडरों का एक तपका हाफिज सईद का इस्तेमाल सिर्फ भारत के खिलाफ करना चाहता है तो दूसरा तपका उसके जरिए वहां की सियासी पार्टियों को कमजोर करना चाहता है। लेकिन, जिस तरह से हाफिज की राजनीतिक महत्वाकांक्षा लगातार बढ़ रही है। उसमें पाकिस्तानी आर्मी के भीतर एक सोच ये भी है कि हाफिज उनके लिए मददगार कम और मुसीबत ज्यादा बन गया है।

ऐसे में मौजूदा पाकिस्तानी हुकूमत और फौज हाफिज को उसके संगठनों पर कार्रवाई के नाम पर डराने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उसका इस्तेमाल अपनी सहूलियत के हिसाब से किया जा सके।

 

 

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