10 नवंबर को GST में मिलेगी राहत! घर बनाना और होटल में खाना होगा सस्ता !

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जीएसटी को लेकर कारोबारियों और आम लोगों की निराशा कम करने के लिए 10 नवंबर को जीएसटी काउंसिल की गुवाहाटी में बैठक होनी है। इसमें आम लोगों को सस्ते सामान और सेवा का तोहफा मिल सकता है। छोटे कारोबारियों का भी टैक्स भार कम किया जा सकता है।

मकान बनाना होगा सस्ता?

मकान बनाने से जुड़ी कई बुनयादी चीजे जीएसटी में सबसे ऊंची कैटगरी यानी 28 फीसदी में हैं। मार्बल, सीमेंट, बिल्डर हार्डवेयर, प्लाईवुड, बिजली का सामान पर सरकार 28% जीएसटी वसूल रही है।

दिल्ली में पहले मार्बल पर 12% वैट लगता था। केजरीवाल सरकार ने इसे घटाकर 5% कर दिया। लेकिन, जीएसटी लागू होने के बाद मार्बल पर सरकार 28% टैक्स वसूल रही है।

सरकार ने 28% की कैटगरी लग्जरी और नकारात्मक चीजों के लिए बनाई है। ऐसे में भवन निर्माण से जुड़े कारोबारियों की मांग है कि मार्बल और सीमेंट जैसी चीजों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाए। राज्यों के वित्त मंत्री भी जीएसटी में लग्जरी कैटगरी यानी 28% की समीक्षा चाहते हैं।

ऐसे में उम्मीद है कि 10 नवंबर को सरकार मकान बनाने से जुड़े ज्यादातर सामानों पर जीएसटी की कम कर सकती है।

होटल में खाना होगा सस्ता!

dhabaगुवहाटी जीएसटी काउंसिल में आपके बाहर खाने के बिल पर भी बड़ा फैसला हो सकता है। मंत्री समूह ने सुझाव दिया है कि एसी रेस्टोरेंट पर लगने वाले 18% जीएसटी को घटाकर 12% कर दिया जाए। वहीं, नॉन एसी रेस्टोरेंट पर जीएसटी 5% तय हो सकता है।

अगर, मंत्री समूह के सुझाव को जीएसटी काउंसिल मान लेती है तो एसी रेस्टोरेंट में एक हजार के बिल पर 1180 रुपये की जगह 1120 रुपये लगेंगे यानी 60 रुपये की बचत। इसी तरह नॉन एसी रेस्टोरेंट में 1000 रुपये के बिल पर टैक्स समेत 1120 रुपये की जगह 1050 रुपये देने होंगे यानी 70 रुपये की बचत ।

छोटे कारोबारियों को मिलेगी राहत!

कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ा कर डेढ़ करोड़ करने का फैसला हो सकता है। इससे कई और कारोबार इस स्कीम के अंदर आ सकते हैं। मंत्री समूह ने मैन्युफैक्चर्स को कुल बिक्री पर 2 की जगह 1 प्रतिशत, रेस्टोरेंट के लिए 5 की जगह 1 प्रतिशत और ट्रेडर्स के लिए 1 की जगह 0.5 प्रतिशत कर भुगतान का सुझाव दिया है।

दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजिशन स्कीम की सीमा को 75 लाख रुपये से बढ़ा कर एक करोड़ किया गया था । अब इसे डेढ़ करोड़ करने पर मंथन चल रहा है।

 

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