GST के नाम पर लूट नहीं चलेगी…सामान पर नई-पुरानी दोनों कीमत लिखी होनी चाहिए!

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GST के नाम पर कुछ कारोबारी जिस तरह से मुनाफाखोरी कर रहे हैं, उसे रोकने के लिए सरकार ने बड़ी तैयारी की है। सरकार ने सभी कंपनियों और कारोबारियों से कहा है कि समानों पर नए प्राइस टैग लगाए जाएं…इसमें नई और पुरानी कीमत में अंतर साफ पता चलना चाहिए। हाल में सरकार ने 178 सामानों पर जीएसटी कम करने का ऐलान किया था।

सरकार का नया फरमान

हाल में सरकार की ओर से कंपनियों को जारी एक पत्र में लिखा गया है कि कानून के मुताबिक सामान पर नया स्टिकर या स्टैम्प लगाने की इजाजत दी जाती है, जिससे कम MRP यानी मैक्सिमम रिटेल प्राइस की जानकारी लोगों को दी जाए। इसके साथ प्रॉडक्ट पर पिछली MRP भी दिखनी चाहिए। सामान पर नई और पुरानी दोनों ही MRP होगी।

हाल में 178 प्रॉडक्ट पर सरकार ने GST रेट कम कर दिया, उसके बाद भी लोगों तक इसका फायदा नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में सरकार ने 31 दिसंबर तक नई कीमत और पिछली एमआरपी के स्टिकर सामान पर लगाने को कहा है। GST दरों में बदलाव के बाद सरकार ने स्टिकर पर नई MRP प्रिंट करने की छूट दी थी, जबकि नियम के मुताबिक पैक पर MRP सीधे प्रिंट की जानी चाहिए।

क्या-क्या सस्ता हुआ था?

10 नवंबर को जीएसटी काउंसिल ने 178 वस्तुओं पर GST की दर 28 से घटाकर 18% कर दी थी। फर्नीचर, पंखा, सेनिटरी के सामान, हाथ घड़ी, चॉकलेट, गोगल्स, शैम्पू, डिटर्जेट पाउडर, सूटकेश, प्लाईवुड, ग्रेनाइट जैसी चीजों को 28 फीसदी की कैटगरी से हटाकर 18 फीसदी की कैटगरी में डाल दिया गया। जीएसटी काउंसिल ने रेस्टोरेंट में लगने वाले टैक्स को घटाकर 5 फीसदी कर दिया। पहले एसी रेस्टोरेंट में खाने पर 18% और नॉन एसी रेस्टोरेंट में 12% जीएसटी देना पड़ता था।

 

 

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