कितने दूर हैं अच्छे दिन ?…कितना कालाधन मोदी सरकार को मिलने वाला है..तीन लाख करोड़ ? ..पांच लाख करोड़ ?…या फिर….

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8 की रात 8 बजे से पूरा देश ये हिसाब कर रहा है कि 500 औऱ 1000 के नोट बंद होने से कितना बड़ा खजाना सरकार के हाथ लगने वाला है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 5 लाख करोड़ रुपए सरकार के खजाने में आने की उम्मीद थी। फिर कुछ लोगों ने इसे तीन साढ़े तीन लाख तक बताया। ये भी बताया गया कि ये पैसा गरीबों के भले के लिए खर्च हो सकता है। ये भी हो सकता है कि हर जनधन एकाउंट में 10 से 15 हजार रुपए डाल दिए जाएं या पिर सारे किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाए। लेकिन ये सब इस पर निर्भर करता है कि सरकार के खजाने में असल में पैसा आ कितना रहा है।

8 नवंबर को कितना पैसा था बैंक में औऱ बाजार में औऱ जेब में..?

आठ नवंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी ने #Demonetisation का एलान किया उस समय 1716.5 करोड़ नोट 500 के औऱ 685.8 करोड़ 1000 रुपए के नोट सर्कुलेशन में थे। आइये इसका हिसाब किया जाए-

  1. 17165000000 X 500 =8580000000000 (8.58 लाख करोड़)
  2. 6858000000 X 1000 =6858000000000 (6.86 लाख करोड)
  3. 500/1000 के कुल नोटों की कीमत (1+2) =15.44 लाख करोड़

यानी 8 नवंबर की रात को 15.44 लाख करोड़ के 500 औऱ हजार के नोट सर्कुलेशन में थे। उस रात बैंको और एटीएम में करीब 70 करोड़ हजार रुपए थे। इसके अलावा बैंकों की तरफ से आरबीआ में जमा होने वाली रकम जिसे कैश रिवर्स रेशियो यान सीआरआर कहते हैं वो भी करीब 4.06 लाख करोड़ रुपए थे।




8 नवंबर के बाद क्या हुआ? बैंक में अब तक कितने रुपए आए?

10 नवंबर से नोट वापसी का काम शुरू हुआ। 28 नवंबर को रिजर्व बैंक ने बताया कि बैंको में 8 लाख 44 हजार 962 करोड़ रुपए कीमत के 500 और 1000 के नोट जमा हो चुके हैं। ये आंकड़ा 10 नवंबर से 27 नंबर तक का है। लेकिन एक दिसंबर को देश के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस चैनल सीएनबीसी ने बताया कि बैंकिंग सिस्टम में 30 नवंबर तक 11 लाख करोड़ रुपए आ चुके हैं।

 cnbc-tweet



तो फिर कालाधन का क्या हुआ?

पहले ये समझिए सरकार नोटबंदी के बाद किसे कालाधन मानती? सरकार का अनुमान था कि नोटबंदी की वजह से करीब 10 लाख करोड़ रुपए बैंकों में जमा होंगे। सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में देश के एटॉर्नी जनरल ने भी कहा था कि सरकार को 500 औऱ 1000 के 10 लाख करोड़ कीमत के नोट वापस मिलने की उम्मीद थी। सरकार को लग रहा था कि बाकी का कालाधन यानी करीब साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए की करेंसी बैंकों में नहीं आएगी, हो सकता है इसे जला दिए जाए, दबा दिया जाए या पानी में बहा दिया जाए। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू शुरू में अपने एक भाषण में इस तरफ इशारा किया था कि कालाधन वाले लोग अपनी काली कमाई को पानी में बहा रहे हैं। लेकिन अब जो आंकड़ा बैंकों की तरफ से आ रहा है वो सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। अगर हम 28 नवंबर के आंकड़े को ही माने तब भी बैंकों में सफेद धन का ये हिसाब होगा-

  1. बैंकों में कुल रुपया आया =844962000000 (आठ लाख 44 हजार 962 करोड़ रुपए)
  2. बैंकों में पहले से थे – 700000000000 (70 हजार करोड़ रुपए)
  3. अगर इस रकम रकम का 80% हिस्सा 500/1000 के नोटों में था तो बैंको में कुल 500/100 के नोट थे-56 हजार करोड़ रुपए
  4. रिजर्व बैंक में 8 नवंबर को बैंकों का सीआरआर था-4.06 लाख करोड़
  5. 4.06 लाख करोड़ में से 500/1000 के नोटों की कीमत रही होगी कुल रकम का 80% यानी-तीन लाख 28 हजार करोड़
  6. यानी 28 नवंबर तक बैंकों में 500 और 1000 के नोट की कुल रकम थी- (1+3+5)=12 लाख 28 हजार 962 करोड़ रुपए।

इस तरह से 28 नवंबर के रिजर्व बैंक के आंकड़े कि मुताबिक 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपए में से 12 लाख 28 हजार 962 करोड़ रुपए कीमत के 500/1000 के नोट बैंको में आ चुके थे। मतलब 12 लाख 28 हजार करोड़ रुए व्हाइट बैंकों के पास आ चुके हैं। अभी 30 दिसंबर तक नोट जमा होने हैं इसलिए ये उम्मीद करना की साढ़े पंद्रह लाख करोड़ रुपए में से एक बड़ी रकम बैंकों में नहीं आएगी ये सच नहीं लगता । यानी अभी ये पता चलना मुश्किल है कि कुल कालाधन कितना था और अगर था तो वो बैंकिंग सिस्टम में कैसे पहुंच गया।  इन हालात में सरकार को ये समझाना मुश्किल हो सकता है कि उसने इतनी बड़ी मुहिम क्यों चलाई।







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