नोटबंदी से किसको कितना नुकसान?

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नोटबंदी ने देश के बाजारों में अघोषित घारा 144 लगा दी है। सब्जी मंडियों से भीड़ गायब है। छोटी राशन की दुकानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। गोल-गप्पे और चाट की दुकानों पर लोगों की भीड़ नहीं लग रही है। क्योंकि, लोगों की जेब में नए नोट नहीं हैं। sachjano.com ने जानने की कोशिश की नोटबंदी का कारोबार पर कितना असर पड़ा है।

मुंबई का बिजनेस हुआ आधा

mumbaiपिछले 10 दिनों में मायानगरी मुंबई का बिजनेस आधा हो चुका है। मुंबई में बाहर खाने-पीने का कल्चर ज्यादा है। शाम होते ही छोटे-बड़े रेस्टोरेंट में भीड़ लग जाती है।




  • नोटबंदी के बाद से मुंबई के रेस्टोरेंट कारोबार आधा हो गया है। मतलब, 10 दिनों में करीब 500 करोड़ का नुकसान।
  • सर्राफा कारोबार में भी 75% की गिरावट दर्ज की गयी है। एक अनुमान के मुताबिक, 10 दिनों में सर्राफा कारोबार को 825 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नोटबंदी का असर दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा है, उन्हें काम नहीं मिल रहा है। दिहाड़ी मजदूरों का काम 50% घट गया है, जिससे 1100 करोड़ का नुकसान हुआ है।
  • प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के कामों में भी 37% की कमी आयी है। बड़ा नोट बंद होने से मुंबई में लोगों ने टैक्सी सेवाएं लेनी कम कर दी है, जिससे टैक्सी कारोबार 25% तक मंदा हुआ है। ऑटो कारोबार में भी 27% की गिरावट देखी गयी है।
  • लोगों के पास कैश नहीं मौजूद होने की वजह से रिटेल कारोबार में 50% की कमी आई है यानी 3300 करोड़ रुपये का नुकसान ।

दिल्ली में भी कारोबार पड़ा ठंडा

hotelराजधानी दिल्ली में भी रेस्टोरेंट, टैक्सी, ऑटो जैसी सेवाओं पर नोटबंदी का असर पड़ा है। लोग नए और छोटे नोट बहुत बचा-बचा कर खर्च कर रहे हैं।

पिछले 10 दिनों में दिल्ली की आजादपुर मंडी में 150 करोड़ रुपये का कम कारोबार हुआ है। रोजाना आजादपुर मंडी में 50 करोड़ से अधिक का बिजनेस होता है। लेकिन, नोटबंदी के बाद से कारोबार में 25-30% की गिरावट आई है।

राजधानी की खारी बावली में भी 600 करोड़ रुपये का कारोबार कम हुआ है। इस बाजार में खास तौर से ड्राई फ्रूट,  पूजा के सामान और मसालों की बिक्री होती है। नोटबंदी के बाद से हर सेक्टर में मंदी छाई हुई है।




नोटबंदी से खतरे में खेती

फाइल फोटो- खेत से आलू निकालते किसान
फाइल फोटो- खेत से आलू निकालते किसान

नवंबर महीना का एक-एक दिन किसानों के लिए बहुत अहम होता है। इसी महीने किसान रबी फसलों की बुआई करते हैं। लेकिन, नोटबंदी से रबी फसलों की बुआई बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

  • यूपी में गेहूं की बुआई सिर्फ 42% ही हुई है। अगर आलू की बात करें तो अब तक सिर्फ 80% खेती हो पायी है। आलू की जो फसल खेतों में लगाई गयी है, वो भी खाद और पानी मांग रही है। कैश की कमी की वजह से किसान न तो बुआई कर पा रहे हैं और न ही पहले से लगाई गयी फसलों की ओर ध्यान दे पा रहे हैं।
  • बिहार में 30 टन आलू के बीज सड़ने की कगार पर हैं। बीज केंद्रों पर किसान आलू के बीज खरीदने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। इसी तरह, नवंबर महीने में बिहार के किसान करीब 3 लाख टन यूरिया और DAP जैसे खाद खरीदते थे। लेकिन, अब तक किसानों ने सिर्फ 68 हजार टन ही खाद खरीदा है।
  • झारखंड में आलू की कीमतें एकाएक आधी हो गयी हैं। गेहूं, तारबूज, सरसों, पालक जैसी सब्जियों के बीजों की ब्रिकी 70% तक घटी है।
  • उत्ताखंड में भी किसान खून के आंसू हो रहे हैं। हरिद्वार और उधमसिंह नगर में आलू की बुआई सिर्फ 10% ही हुई है। वहीं, मटर और सरसों की बुआई 50% तक प्रभावित हुई है। अगर 15 दिसंबर तक नोटबंदी से पैदा हुए हालात सामान्य नहीं हुए तो कृषि उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित होने की आशंका है।

 







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