किसने कहा मत करो डिमोनेटाइजेशन उर्फ नोटबंदी ?

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जो आज हुआ वो चार साल पहले भी हो सकता था। 1000, 500 के नोट कांग्रेस के शासन काल में भी हटाए जा सकता थे। औऱ प्लान तो ये था कि अब इनकी जगह बड़े नए नोट नहीं ला जाएंगे। तो फिर तब किसने रुकवाया डिमोनेटाइजेशन को ?

डिमोनेटाइजेशन के खिलाफ रिपोर्ट में क्या था?

जब दिल्ली में बाबा रामदेव, अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल औऱ बीजेपी के नेता ब्लैक मनी के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे तब यूपीए सरकार कुछ ऐसा कदम उठाने की कोशिश में थी जिससे  उस पर जनता का भरोसा बने। इसी के तहत CBDT यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज प्रमुख की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गयी। इस कमेटी का काम था कि वो तमाम एजेंसियों और जनता के नुमाइंदों से चर्चा कर ब्लैकमनी पर काबू करने के रास्ते सुझाए।

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CBDT ने क्यों नहीं मानी जनता की राय?

CBDT ने जब जनता से ब्लैक मनी को रोकने के सुझाव में आगे तो उसके पास बड़ी तादाद में लोगों की राय आई। इसमें सबसे ज्यादा लोगों का यही कहना था कि 500 औऱ 1000 के नोट बंद कर दिए जाएं। लेकिन सीबीडीटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ साफ कह दिया कि इसका कालाधन रोकने में कोई फायदा नहीं होगा। तब सीबीडीटी ने वित्त मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी उसमें ये दलीलें दी गयीं थी-

  1. बड़े नोट बंद करना कालाधन रोकने का कोई सोल्यूशन नहीं है। ब्लैकमनी ज्यादा बड़ी तादाद में बेनामी जमीन, जेवरात और सोने चांदी के धंधे में है।
  2. रिपोर्ट में कहा गया कि इतनी बड़ी तादाद में नए नोट छापने और उनको सही जगह पहुचाने का खर्चा बहुत ज्यादा होगा।
  3. CBDT ने कहा कि नोटबंदी से बैंकिंग सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। नोच लाने ले जाने औऱ बांटने की व्यव्स्था बहुत मुश्किल है।
  4. सबसे ज्यादा असर निचले तबके के लोगों पर पड़ेगा। दैनिक वेतन लेने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान होंगे। नकद सेलरी देना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
  5. उस वक्त वित्त मंत्रालय की जांच एजेंसियों ने भी डिमोनेटाइजेशन के खिलाफ राय रखी। इसमें ईडी (Enforcement Directorate), डीआरआई (Directorate Revenue Intellegence) और एफआईयू ( FinanciaI Intelligence Unit) शामिल थे।

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जनता ने और क्या राय दी थी?

उस वक्त देश की जनता ने कालाधन रोकने के लिए वॉलंटरी डिस्क्लोजर स्कीम औऱ एक मजबूत लोकपाल बिल की भी वकालत की थी। तब की यूपीए सरकार ने लोकपाल बिल पर तो काम किया लेकिन डिमोनेटाइजेशन और वीडीएस को खारिज कर दिया। लेकिन मोदी सरकार ने इन दोनों सुझावों को लागू करवा दिया है।

 




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