हिंदुस्तान में बिना कैश काम ही नहीं चलता !

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बैंकों के बाहर लाइन छोटी होने का नाम नहीं ले रही है। लंबी-लंबी लग्जरी गाड़ियों से निकल कर और सड़क के बाहर खोमचा लगाने वाले सब एक साथ बैंक के बाहर लाइन में खड़े हैं, नोट बदलने के लिए। सबसे बड़ी बात अमीर-गरीब सब अपने विचार लंबी लाइन में एक-दूसरे से शेयर कर रहे हैं। सरकार को कोस रहे हैं। सरकार की तारीफ कर रहे हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार की इस पहल से क्या-क्या बदलाव होगा?

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हिंदुस्तान में बिना कैश काम ही नहीं चलता। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, स्वाइप मशीन के होते हुए भी हिंदुस्तान के लोगों को लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है, क्योंकि बिना कैश जिंदगी की गाड़ी पर सीधा ब्रेक लग जा रहा है। sachjano.com ने जानना चाहा कि प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल में आखिर लोगों को परेशानी क्यों और कहां हो रही है?




  1. जनधन योजना को मिला कर हिंदुस्तान की करीब 75% आबादी का बैंक में खाता खुल चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 23 करोड़ क्रेडिट कार्ड वाले लोग हैं। वहीं, 64 करोड़ लोगों की पहुंच डेबिट कार्ड तक है। लेकिन, देश के लोग अभी भी प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल में हिचकते हैं। मतलब, खरीदारी और लेन-देन के लिए क्रेडिट और डेबिट कार्ड की जगह कैश को प्राथमिकता देते हैं।
  2. हिंदुस्तान के 75% लोगों का बैंक में खाता है। लेकिन, बैंकिग सेवाओं का लोग पैसा जमा करने और निकालने के ही ज्यादा करते हैं। उन्हें पता ही नहीं कि डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं के जरिए लेन-देन की प्रक्रिया को आसान और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
  3. हिंदुस्तान का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ऑनलाइन बैंकिंग को शक की नजर से देखता है। रुपयों के लेन-देन के लिए पारंपरिक तरीकों मसलन चेक, ड्राफ्ट और कैश का इस्तेमाल करता है। एक अनुमान के मुताबिक, फिलहाल सिर्फ 7% खाताधारक ही बेहिचक ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  4. देश में अभी भी स्वैपिंग मशीन की बहुत कमी है। स्वैपिंग मशीन ज्यादातर बड़े शहरों की बड़ी दुकानों में ही मिलती है। एक आंकड़े के मुताबिक, देश में कुल 14.4 लाख स्वैपिंग मशीन हैं, जिनमें से अधिकतर बड़े शहरों में इस्तेमाल हो रही हैं।





दुनिया की कैशलेस सोसाइटी का सच

  1. बेल्जियम सबसे तेजी से कैशलेस सोसाइटी की ओर बढ़ रहा है। वहां 3 हजार यूरो से अधिक के नकद लेनदेन पर रोक है। इसके लिए वहां कानून भी है। नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त सजा और मोटा जुर्माना वसूला जाता है। बेल्जियम में बैंकों और सरकारी स्तर पर ई-पेमेंट के लिए मोबाइल एप हैं। वहां 93% कैशलेस लेनदेन होता है।
  2. फ्रांस में भी 3 हजार यूरो से अधिक के नकद लेन-देन पर कानूनी तौर पर रोक है। फ्रांस में सिर्फ 69% लोगों के पास डेबिट कार्ड हैं। लेकिन, 92% लेन-देन लोग कैशलेस यानी ईपेमेंट करते हैं। स्वीडन में 96% लोगों के पास डेबिट कार्ड है। वहां, जब से कैशलेस ट्रांजेक्शन में बढ़ोत्तरी हुई, लूट और झपटमारी की घटनाओं में एकाएक कमी आ गयी।
  3. 2013 में कनाडा में सिक्कों को बंद कर दिया गया और करीब 78% कारोबारियों ने प्वाइंट ऑफ सेल प्रणाली अपनाई। अब कनाडा में 90% से अधिक लेन-देन कैशलेस होता है। ब्रिटेन भी इसी राह पर है। वहां भी 89% लेन-देन कार्ड और मोबाइल एप के जरिए होता है।
  4. ऑस्ट्रेलिया में 86%, नीदरलैंड में 85%, अमेरिका में 80%, जर्मनी में 76%, दक्षिण कोरिया में 70%, दक्षिण अफ्रीका में 43%, केन्या में 27% लेन-देन कैशलेस होता है।

भारत में नोटबंदी का साइड इफेक्ट

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  1. नोटबंदी के बाद 86% की बढ़ोत्तरी कार्ड स्वाइप से होने वाले भुगतान में देखी गयी
2. डेबिड कार्ड से होनेवाले लेन-देन में 108% की बढ़ोत्तरी हुई
3. क्रेडिड कार्ड से होने वाले भुगतान में भी 60% बढ़ोत्तरी देखी गयी
  1. छोटे शहरों से भी स्वाइप मशीनों की डिमांड एकाएक बढ़ गयी है

नोटबंदी के बाद से धीरे-धीरे लोग कैश को सुरक्षित बचा कर बटुए में रखने लगे हैं और खरीददारी के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि, ATM में पैसा है नहीं और बैंक से पैसा निकालने का मतलब है- कई घंटों लाइन में खड़े रहना और अगर आपकी बारी आने से पहले ही कैश खत्म हो गया तो फिर अगले दिन लाइन में खड़े होने के लिए तैयार रहिए !




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