नोटबंदी के लिए ये हफ्ता है सबसे अहम, सैलरी डे के बाद होगा सरकार का असली इम्तिहान

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इस महीने की सैलरी 30 नवंबर की रात या एक दिसंबर को आपके खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। लेकिन, आप के लिए बैंक या ATM से कैश निकालना समुद्र से मोती निकालने जैसा ही होगा। 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही बैंकों के बाहर लंबी लाइन लगने लगी, ATM में कैश का सूखा पड़ गया। लेकिन, कैश के लिए असली कोहराम तो 1 दिसंबर से शुरू होगा।

1 दिसंबर से कैश के लिए मारा-मारी क्यों होगी?

atm38 नवंबर को जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया था, तब तक लोग अपने महीने के खर्च का बड़ा हिस्सा बैंक या ATM से निकाल चुके थे। मतलब, लोगों को खर्च के लिए ज्यादा पैसे की जरुरत नहीं थी। घर में बचे छोटे नोट या फिर बैंकों से नोट बदलने से लोगों का काम निकल गया।

असली दिक्कत दिसंबर में होनी तय है। क्योंकि, महीने के शुरू में लोग अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा कैश में निकालते हैं। शुरुआत में कई तरह के छोटे-बड़े खर्चे कैश में निपटाए जाते हैं। फिलहाल, देश के बैंक नई करंसी की भारी कमी से जूझ रहे हैं।



ATM से लोगों को कितना फायदा होगा?

atm-2देश भर में मौजूद करीब आधे ATM नए नोट देने के लिए तैयार किए जा चुके हैं। लेकिन, दिक्कत ये है कि ATM से हफ्तेभर में दो हजार रुपये से अधिक नहीं निकल सकते। अगर 20 ATM के चक्कर लगाने और फिर 2-3 घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद 2 हजार कैश मिल भी गए, तो महीने के पहले हफ्ते में वो ऊंट के मुंह में जीरा जैसा ही होगा।

1 दिसंबर को किसके अच्छे दिन आएंगे?

सी और डी ग्रेड के केंद्रीय कर्मचारियों को उनकी सैलरी में से 10 हजार रुपये कैश एडवांस में मिल जाएंगे। कुछ राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों को महीने के शुरू में सैलरी का कुछ हिस्सा कैश में देने की तैयारी की है। जिससे सरकारी कर्मचारियों को तो कैश मिल जाएगा, लेकिन प्राइवेट नौकरी वाले मोबाइल पर सैलरी एकाउंट में ट्रांफसर होने का मैसेज देख कर ही हिसाब लगाते रहेंगे कि उनके बैंक के किस ब्रांच की लाइन थोड़ी छोटी है या जहां दिन भर लाइन में खड़े होने के बाद भी कैश मिल जाए।




कितने कैश से चल सकता है हिंदुस्ताना का काम?

marriageजानकारों का मानना है कि देश के सभी लोगों की कैश जरुरतों को पूरा करने के लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपये चाहिए। क्योंकि, 500-1000 के नोट बंद होने से बाजार से करीब 15 लाख करोड़ रुपये बाहर हो गए हैं।

देश में रोजना औसतन 15 से 20 हज़ार करोड़ रुपये कैश की जरूरत होती है। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, मुंबई में रोजाना 150 करोड़ कैश की जरुरत होती है, लेकिन नोटबंदी की वजह से सिर्फ 25 करोड़ ही कैश मिल पा रहा है। दिल्ली में रोजाना 130 करोड़ कैश की जरुरत होती है, जबकि मिल रहे हैं सिर्फ 25 करोड़।

जानकारों के मुताबिक, लोगों की जरुरत भर कैश का इंतजाम करने में सरकार को अभी सात से आठ हफ्ते लग सकते हैं। मतलब, नया साल भी कैश के जुगाड़ में ही बीतने की आशंका है।

कैसे हो रहा है नई करंसी का इंतजाम?

कैश क्राइसिस से निपटने के लिए नए नोटों की छपाई का काम टॉप गियर में चल रहा है। नोटों की छपाई वाली मशीने 24 घंटे चल रही हैं।

नासिक प्रेस में रोज साढ़े तीन करोड़ रुपये के 500 के नोटों की प्रिंटिंग हो रही है। लेकिन, अब रोजाना दोगुना से अधिक नोटों की छपाई का टारगेट रखा गया है।

देश में देवास, मैसूर, नासिक और पश्चिम बंगाल के सालबोनी में नोट छापने का काम होता है। नोट प्रिंटिंग के काम से जुड़े कर्मचारी और अफसर दिन-रात काम कर रहे हैं। कर्मचारियों के लिए भोजन-पानी की ऐसा व्यवस्था की गयी है, जिससे नोट प्रिंटिंग मशीन एक मिनट के लिए भी बंद न हों ।

 







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