अब बिल्डरों की खैर नहीं…चलने लगा ‘रेरा’ का हंटर

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बात 2014 मार्च की है। कुमार ने दिल्ली से सटे नोएडा एक्सटेंशन में एक नामी बिल्डर के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करवाया। टॉवर का पूरा ढांचा तैयार था। कुमार को बिल्डर ने भरोसा दिया कि साल भर में फ्लैट का पजेशन मिल जाएगा। फ्लैट की कीमत थी 30 लाख रुपये। कुमार ने फ्लैट की कीमत का 90% हिस्सा तुरंत बिल्डर को दे दिया बाकी रकम पजेशन के वक्त देनी थी। लेकिन, आज तक पजेशन नहीं मिला है। ऐसे में कुमार को ये समझ नहीं आ रहा है कि बिल्डर के खिलाफ कहां दरवाजा खटखटाएं? विवेक, श्रीधर, हरि, रमेश और सुरेश जैसे लाखों लोगों के खून पसीने की कमाई बिल्डरों के पास फंसी हुई है।

पजेशन में देरी तो देना होगा जुर्माना

बिल्डरों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए रियल एस्टेट रेग्युलेटरी एजेंसी यानी रेरा का हंटर चलने लगा है। रेरा ने एक फ्लैट खरीददार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि पजेशन की देरी की वजह से बिल्डर को अब हर महीने 50 हजार की पेनल्टी बायर को देनी होगी।

लक्ष्मी देवी ने बुललैंड बिल्टेक के ग्रेटर नोएडा स्थित प्रॉजेक्ट में 25-25 लाख के दो फ्लैट बुक कराए थे। पैसा भी पूरा जमा करा दिया। बिल्डर को पजेशन अक्टूबर 2015 तक देना था। करार के मुताबिक, 30 सितंबर 2016 तक पजेशन नहीं देने पर बिल्डर को पेनल्टी देनी थी।

जब समय पर प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ तो लक्ष्मी ने केस दर्द कराया और चार महीने पहले रेरा में शिकायत की। रेरा ने लक्ष्मी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अक्टूबर 2017 से बिल्डर पर जुर्माना लगाया।

चल रहा है रेराका हंटर

सूत्रों के मुताबिक, रेरा बिल्डर-बायर्स से जुड़े करीब 150 से अधिक मामलों में फैसला सुना चुका है, जिसमें से 40 से अधिक मामलों में बिल्डरों को बीबीए यानी बिल्डर-बायर समझौते की शर्तों के उल्लंघन का दोषी माना गया। ऐसे बिल्डरों पर जुर्माना भी लगाया चुका है।

कैसे करें रेरा में शिकायत?

कोई भी फ्लैट खरीददार अपने बिल्डर के खिलाफ रेरा की वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए एक हजार रुपये की फीस ऑनलाइन चुकानी होती है। कागजात भी वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। शिकायत की प्रक्रिया पूरी होने पर एक कंप्लेन नंबर मिलेगा। ईमेल पर तारीख भी मिल जाएगी। तय तारीख को लखनऊ में रेरा के सामने पेश होना होगा।

रेरा में शिकायतों के निपटारे के लिए 90 दिन की डेडलाइन तय है। लेकिन, केस प्रक्रिया के हिसाब से ये आगे-पीछे हो सकती है। अगर आप भी बिल्डर से परेशान हैं या आपके बिल्डर ने शर्तों को तोड़ा है तो रेरा की वेबसाइट पर इंसाफ की गुहार लगा सकते हैं।

 

 

 

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