जनवरी में ही शुरू हो गया था बीजेपी का जमीन खरीदो प्रोग्राम…क्या नोटबंदी से है इसका लिंक?

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शुक्रवार को कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां ने बीजेपी के खिलाफ नया मोर्चा खोला। इन पार्टियों का आरोप है कि नोटबंदी के ठीक पहले बीजेपी ने बिहार में 22 जगह जमीनें खरीदी औऱ इसके जरिए कथित काले धन को सफेद किया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस स्कीम के बारे में बीजेपी के कुछ लोगों को पता था और इसका इस्तेमाल बीजेपी की “कच्चे खाते’ वाली दौलत को ठिकाने लगाने में किया गया। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने लिखा कि बीजेपी ने नोटबंदी से पहले देश के अलग अलग कोनों में करोड़ों अरबों की संपत्ति खरीदी।

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जवाब में बिहार में बीजेपी के विधायक  संजीव चौरसिया ने कहा कि “इसमें कुछ नहीं है, पार्टी ने अलग अलग जिलों में दफ्तर खोलने के लिए जमीने खरीदी, बस इतनी सी बात है” । संजीव चौरसिया का नाम बिहार में हुए जमीन के सौदों में आया है।

 

कहां से शुरू हुआ जमीन के सौदों का काम? 

बिहार में हुए जमीन के सौदे सितंबर से अक्टूबर के बीच के हैं। इन तारीखों को देखकर सवाल उठता है कि क्या प्लान के तहत नोटबंदी से पहले इन सौदों को अंजाम दिया गया? इस आरोप का जवाब गहन जांच से ही मिल सकता है। #SachJano की रिसर्च के मुताबिक देशभर में जमीनें खरीदने का प्लान बीजेपी ने इस साल की शुरुआत में ही तैयार कर लिया था। जनवरी में बतौर अध्यक्ष अमित शाह की दूसरी पारी के साथ ही देश के हर जिले में बीजेपी का दफ्तर बनाने का प्लान शुरू हो गया था।



अमित शाह को चाहिए कांग्रेस से बड़ा साम्राज्य!

पांच फरवरी की इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने के चार दिन बाद ही अमित शाह के करीबी औऱ बीजेपी के महासचिव अरुण सिंह ने हर राज्य के बीजेपी प्रमुख औऱ  संगठन महामंत्रियों को 12 प्वॉइंट की एक चिट्ठी लिखी। इसमें कहा गया कि हर राज्य में औऱ जिले में एक पार्टी ऑपिस होना चाहिए। पार्टी ऑफिस के लिए जमीन किस तरह से हासिल की जाए इसका भी ब्यौरा इस चिट्ठी में था। 28 जनवरी को लिखी गयी इस चिट्ठी में बताया गया कि हर स्तर पर जमीन के अधिग्रहण के बाद रजिस्ट्री के ओरिजिन कागजात यूनिट ऑफिस औऱ पार्टी के मुख्यालय में भेजे जाएं। इस चिट्ठी में ये बी लिखा गया था कि हर ऑपिस का नक्शा और आर्किटेक्चर भी पार्टी मुक्यालय से ही तय होगा। सभी दफ्तरों को एक जैसा बनाए जाने का प्लान था। इस रिपोर्ट में ये भी लिखा गया था कि जमीनों से संबंधित सारी कार्रवाई और खर्चे का हिसाब किताब गुप्त रखा जाए। इस वक्त देश में सबसे

ज्यादा जमीन अगर किसी राजनीतिक दल के पास है तो वो है कांग्रेस पार्टी। कई इलाकों में तो कांग्रेस की जमीनों पर कब्जा हो चुका है और वो कानूनी लड़ाई लड़ रही है। माना जाता है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह चाहते हैं कि पार्टी का लैंडबैंक कांग्रेस से बड़ा होना चाहिए। इसीलिए पूरे देश में बीजेपी जमीनें खरीद रही है।

 








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