2019 के लिए बीजेपी का ‘बंगाल प्लान’

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गुजरात चुनाव के बाद से बीजेपी एक-एक लोकसभा सीट का बारीकी से हिसाब लगा रही है। हर राज्य के लिए वहां के मिजाज के हिसाब से रणनीति तैयार की जा रही है। बीजेपी के बिग बॉस अमित शाह की नजर खास तौर से पश्चिम बंगाल पर है। बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यहां कमल खिलाने के लिए खाद-पानी डालना और तेज कर दिया है। बंगाली मानुष को बीजेपी से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम एक साथ चलाए जा रहे हैं।

क्या है बीजेपी का बंगाल प्लान’?

बीजेपी और संघ मिलकर बंगाल में एक जनआंदोलन खड़ा करने के प्लान पर आगे बढ़ रहे हैं। इसके जरिए बंगाली मानुष और बुद्धिजीवियों में ममता सरकार के खिलाफ हवा बनाने की तैयारी है। बीजेपी और संघ ने सूबे के कला, फिल्म, खेल और दूसरे क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों और एनजीओ का सहारा लेने का फैसला किया है। नाम दिया जाएगा- नब बंगो मतलब नया बंगाल अभियान।

नब बंगो अभियान को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा है, जिससे नए बंगाल के नाम पर ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें। 28 जनवरी को कोलकाता के इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन के ऑडिटोरियम से इस अभियान की शुरूआत होगी।

अभियान के तरह पश्चिम बंगाल के हर जिले में नब बंगा अड्डा का आयोजन होगा। कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को बंगाल के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और संस्कार के साथ-साथ सूबे की बदहाली का भी जिक्र करेंगे। मतलब, बंगाल के लोगों को नब बंगो अभियान के जरिए उनका सुनहरा इतिहास बताया जाएगा। सूबे की गरीबी और बेहाली के लिए मौजूदा टीएमसी और पुरानी लेफ्ट की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सूबे के लोगों को चमकते-दमकते बंगाल का सपना दिखाया जाएगा।

बीजेपी के लिए बंगाल जीतना जरुरी क्यों?

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। 2014 की मोदी सुनामी में भी बंगाल से बीजेपी के खाते में सिर्फ 2 सीटें ही आईं। उसके बाद से ही बीजेपी बंगाल में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुट गयी। बीजेपी ने पहले बंगाल में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए अपना टॉरगेट 20 सीटों का रखा था। स्थानीय चुनावों के नतीजों के बाद अपना अभियान और तेज कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, अब बीजेपी ने बंगाल में अपना टॉरगेट बढ़ा दिया है।

पार्टी रणनीतिकारों को लग रहा है कि अगर बीजेपी शासित सूबों में सीटें कम भी हुईं तो उसकी भरपाई बंगाल में आसानी से हो सकती है। इसीलिए, अमित शाह बंगाल में दलितों के घर खाना खाने से लेकर नक्सलवाड़ी तक का चक्कर लगा चुके हैं। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से नाराज लोगों की बीजेपी की गाजे-बाजे के साथ एंट्री करवाई जा रही है, जिससे 2019 में पश्चिम बंगाल में यूपी जैसी जीत हासिल की जा सके।

बंगाल में संघ कितना मजबूत?

2011 में पश्चिम बंगाल में आरएसएस की शाखाओं की संख्या सिर्फ 530 थीं, जो अब 1500 पार कर गयी हैं। सुबह-सुबह संघ की शाखाओं में लोगों की तादाद बढ़ रही है। अपने काम से संघ से जुड़ी संस्थाएं लगातार लोगों के दिलों में जगह बना रही हैं। सिर्फ कोलकाता में ही तीन हजार से अधिक सरस्वती शिशू मंदिर स्कूल चल रहे हैं।

बंगाल के बुद्धिजीवियों ने ब्रिटिश इंडिया में लोगों को राष्ट्रवाद का मतलब समझाया। अब संघ राष्ट्रवाद को नए सिरे से हिंदुत्व के लवादे में लपेट कर पेश करने की कोशिश में जुटा है। तेजी से विस्तार कर रहा है तो बीजेपी को 2019 में बंगाल की जमीन पर बड़ा फायदा दिख रहा है।

 

 

 

 

 

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