भोपाल के वो 10 घंटे…जेल से आतंकियों के भागने से लेकर एनकाउंटर तक की पूरी कहानी

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पूरा हिंदुस्तान दिवाली के जश्न में डूबा था। भोपाल में रात की खामोशी को पटाखे तोड़ रहे थे। लोग दिवाली पूजा के बाद घरों की बत्तियां जला कर धन की देवी लक्ष्मी का इंतजार कर रहे थे। भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 3400 कैदियों में से 8 खूंखार कैदी आंखों के इशारे से बात कर रहे थे। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी के 30 से अधिक खूंखार आतंकी भोपाल जेल में बंद हैं।




जेल से कैसे भागे आतंकी?

bhopal-jailभागने वाले सभी 8 आतंकी जेल के बी ब्लॉक में कैद थे। आतंकियों को अंदाजा था कि दिवाली की रात सुरक्षा व्यवस्था चौकस नहीं होगी। आतंकियों ने जेल में इस्तेमाल होने वाली खाने की प्लेट को धारदार हथियार की शक्ल दे दी। जेल की करीब 35 फीट ऊंची दीवार फांदने के लिए आतंकियों ने ओढ़ने के लिए दी गई चादरों की रस्सी बना ली।
जेल के गार्ड रमाशंकर यादव और चंदन बी ब्लॉक में ड्यूटी पर तैनात थे। रात में करीब 2 बजे किसी बहाने से आतंकियों ने अपनी सेल का दरवाजा खुलवाया। दरवाजा खुलते ही आतंकियों ने सबसे पहले गार्ड रमाशंकर की हत्या कर दी और चंदन के हाथ-पैर बांध दिए।

चादरों की रस्सी में बीच-बीच में लकड़ी बांध दी, जिससे जेल की 30 फीट ऊंची दीवार को आसानी से फांदा जा सके। दीवार के पार भी एक और दीवार है,  जिस पर कटीली तार लगी हुई थी। उस दीवार में एक दरवाजा भी है। जिसका ताला तोड़ने की आतंकियों ने बहुत कोशिश की। ताला तो नहीं टूटा लेकिन दीवार की कुछ ईंटें जरुर बाहर निकल आईँ और आतंकी आराम से जेल से बाहर आ गए।

कहां थे जेल के सुरक्षाकर्मी?

सूत्रों के मुताबिक, जेल प्रशासन ने दिवाली के मौके पर एक साथ आधे से अधिक  स्टाफ को छुट्टी दे दी थी। SAF के चार जवानों को खास तौर से आतंकियों की निगरानी के लिए सरकार ने रखा था। लेकिन, जब आतंकी फरार होने के प्लान पर काम कर रहे थे, तब SAF  के जवान सो रहे थे।

सेल में बंद कैदियों की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी कुछ दिनों से काम नहीं कर रहे थे। आतंकियों ने जेल की लचर सुरक्षा इंतजामों का पूरा फायदा उठाया ।




जेल से भागने के बाद आतंकियों ने क्या किया?

करीब तीन बजे आतंकी जेल से बाहर निकले। इस बात की पूरी आशंका है कि जेल के बाहर कोई उनका इंतजार कर रहा था। रात के अंधेरे में फरार आतंकियों ने सबसे पहले कपड़े बदले और पैदल ही भोपाल की बैरसिया रोड की ओर बढ़ने लगे। धीरे-धीरे सूरज निकलने लगा था। सभी 8 आतंकी जेल से करीब 10-12 किलोमीटर दूर ईंटखेड़ी के करीब पहुंच गए। शायद, इस इलाके में उनका कोई पुराना परिचित या मददगार होगा।

कैसे हुआ फरार आतंकियों का एनकाउंटर?

bhopal-3आतंकियों के जेल से फरार होने की सूचना सुबह 5 बजे तक भोपाल में सुरक्षा से जुड़े हर प्वाइंट तक पहुंचा दी गयी। लोकल पुलिस और एटीएस की अलग-अलग टीमें आतंकियों की तलाश में जुट गयीं।

  • इसी बीच ईंटखेड़ी गांव के पास मनोज मीणा नाम के एक शख्स ने 8 संदिग्धों को जंगल की ओर जाते देखा। व्हॉट्सएप पर वायरल एक-दो तस्वीरों से मिलती जुलती शक्ल देखते ही तुरंत पुलिस को कंट्रोम रूम को सूचना दी गयी।
  • पुलिस ने सूचना देने वाले से चुपचाप संदिग्धों का पीछा करने को कहा। इस बीच, लोकल पुलिस और ATS की टीम पूरी तैयारी के साथ पहुंच गयी। पुलिस ने खेजड़ादेव के आसपास के इलाकों को चारों ओर से घेर लिया।
  • आतंकी गांव से करीब 100 मीटर दूर मनीखेड़ी पहाड़ी पर छिपे थे। पुलिस के मुताबिक, फरार आतंकियों से सरेंडर के लिए कहा गया। लेकिन, आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। करीब 45 मिनट तक चले एनकाउंटर में लोकल पुलिस और ATS ने सभी 8 आतंकियों को मार गिराया। भोपाल के आईजी योगेश चौधरी के मुताबिक, आतंकियों के पास से 4 फायर आर्म्स और 3 धारदार हथियार मिले हैं।

मध्यप्रदेश पुलिस ने करीब 8 घंटे में ही जेल से फरार सिमी के सभी 8 आतंकियों को मार गिराया। लेकिन, विपक्षी पार्टियां मध्यप्रदेश पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठा रही हैं।




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