नोटबंदी ला रही है मंदी ? ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री पर बड़ा असर..विज्ञापनों के कई करार रद्द..

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नोटबंदी के फैसले के बाद ही इस बात पर चर्चा होने लगी थी कि कहीं इसकी वजह से बाजार में मंदी तो नहीं आ जाएगी। शुरुआती संकेतों से लग रहा है कि बाजार ने इस फैसले को फायदेमंद नहीं माना है। डिओलाइट नाम की अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टिंग एजेंसी कह चुकी है की इनफॉर्मल सैक्टर पर इस फैसले का नकारात्मक असर पड़ना तय है। ये वो सैक्टर हैं जहां नगद पैसों का लेनेदेने होता है। लेकिन पहली बार फॉर्मल सैक्टर में भी मंदी की दस्तक से हड़कंप है। #SachJano के पास खबर है कि टेलीविजन कंपनियों के विज्ञापनदाताओं ने भी कुछ करार कैंसिल कर दिए हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों का दावा है कि यहां 100 फीसदी कारोबार व्हाइट में यानी बैंकिंग चैनल्स के जरिए होता है।

IBF ने किया मंदीका खुलासा !

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन यानी IBF ने अपने सारे सदस्यों को एक ईमेल भेजा है। इसमें लिखा गया है कि नोटबंदी के फैसले के बाद कई विज्ञापनदाताओं औऱ एजेंसियों ने आईबीएफ सदस्यों (यानी टीवी चैनल्स) के मौजूदा करारों को रद्द करने की चिट्ठियां भेजनी शुरू कर दी हैं। आईबीएफ के मुताबिक उसके सभी सदस्य सारी डील्स चैक, बैंक ड्राफ्ट औऱ दूसरे बैंकिंग चैनल्स के जरिए करते हैं, इसलिए करार रद्द करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। आईबीएफ ने इस मेल के जरिए सभी चैनल्स को कहा है कि वो अपने विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों को बता दें कि वो तय करारों का पालन करें।

कितना नुकसान होगा?

टीवी इंडस्ट्री के सुत्र बताते हैं कि कैश में काम करने वाले विज्ञापनदाता अपने हाथ पीछे खींच रहे हैं। इनमें से ज्यादातर का ताल्लुक पान मसाला, रीयल इस्टेट औऱ शक्तिवर्धक दवाओं की कंपनियों से है। कुछ टेली मार्केटिंग के स्लॉट्स भी बंद कर दिए गए हैं। अगर ये विज्ञापन बंद हो गए तो टेलीविजन चैनल्स को 30 सा 50 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है। 2008-09 की मंदी के बाद टीवी चैनलों को ये सबसे बड़ा झटका होगा।

 

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