4 करोड़ लोगों को मार रहा है धीमा जहर!

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दिल्ली-NCR में हर साल प्रदूषण से करीब 30 हजार लोगों की मौत होती है। डॉक्टरी भाषा में बीमारियों की वजह अलग-अलग बताई जाती है। लेकिन, बड़ा सच यही है कि 30 हजार मौतों की असली वजह धीमा जहर है जो प्रदूषण को रूप में लोगों को शरीर में घुल रहा है और लोगों की जान ले रहा है। सरकार की ओर से इस धीमा जहर को खत्म करने के लिए ईमानदारी से कोशिश नहीं हो रही है।

दिल्ली-NCR में कितना जहर?

9 नवंबर को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 486 देखा गया। गाजियाबाद में AQI 499, गुडगांव में 494, नोएडा में 487 और फरीदाबाद में 482 रिकॉर्ड किया गया। ऐसी आबोहवा के सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक माना जाता है।

इस हवा में सांस लेने का मतलब है, 60-70 सिगरेट जीतना धुंआ अपने अंदर खींचना। सोचिए, दिल्ली-NCR में लोग कितना धीमा जहर अनजाने में रोज खींच रहे। ऐसी जहरीली हवा में बच्चों और बुजुर्गों का सबसे बुरा हाल है।

ऑड-ईवन से कितना कम होगा प्रदूषण?

प्रदूषण कम करने के लिए केजरीवाल सरकार से दिल्ली में ऑर्ड-ईवन लागू करने का फैसला किया है। ऑर्ड-ईवन 13 से 17 नवंबर तक लागू होगा। दिल्ली सरकार पहले भी प्रदूषण कम करने के लिए ऑर्ड-ईवन लागू कर चुकी है। तब दिल्ली सरकार के इस फैसले से प्रदूषण में 4 से 7% की कमी आई थी। मतलब, केजरीवाल सरकार की ऑर्ड-ईवन पहल प्रदूषण कम करने के लिए ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है।

गाजियाबाद-नोएडा में प्रदूषण करने करने का प्लान

*NCR में 10 साल पुराने डीजल वाहन सीज करने की तैयारी। 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर भी रोक लगाने की तैयारी

*बिल्डिंग मटीरियल की ढुलाई, खनन, सड़क निर्माण पर रोक, खुले में रखा गया निर्माण सामान होगा सीज। सभी निर्माण कार्य रोकने का निर्देश लेकिन मजदूरों को मजदूरी मिलती रहेगी।

*धुआं निकालने वाले सभी कारखाने बंद होंगे। फसलों का बचा हिस्सा यानी डंठल जलाने पर यूपी में रोक ।

कितना कम होगा प्रदूषण?

दिल्ली-NCR में धुआं छोड़ने वाले कारखानों और पुरानी गाड़ियों के बंद होने से प्रदूषण में कम से कम 20-25% कमी आने की उम्मीद है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल और निर्माण कार्य पर नियंत्रण से भी 20-25%  प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।

क्या दिल्ली-NCR की हवा से जहर कम होगा?

बात 1995-96 की है। दिल्ली में गाड़ियों से निकलने वाले काला धुआँ और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुआं ने मिलकर NCR को गैस चेंबर में बदल दिया था। तब शाम में दिल्ली के दरियागंज और लाल किला से गुजरने के बाद सफेद रुमाल से चेहरा साफ करने पर पूरी रुमाल काली हो जाती थी। आजादपुर इलाके से गुजरने के बाद चेहरा साफ करने पर पानी काला गिरता था। दिल्ली में कई इलाके ऐसे थे-जहां से गुजरने पर चक्कर आता था।

इसी दौर में दिल्ली की आबोहवा साफ करने की बड़ी कोशिश हुई। दिल्ली में जहरीला धुआं छोड़ने वाली फैक्ट्रियों को बाहर शिफ्ट किया जाने लगा। बसों में सीएनजी फिट करने का काम शुरू हुआ। पुरानी दिल्ली में चलने वाली फटफट सेवा भी पूरी तरह बंद कर दी गयी। कुछ साल में ही सख्ती के बाद दिल्ली की आबोहवा काफी सुधर गयी।

अब दिल्ली-NCR की हवा साफ करने के लिए बहुत कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है। नहीं तो ट्रेलर सामने है, पूरी फिल्म कितनी भयावह होगी कि इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

 

 

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