वो किताब जिसमें बाबा रामदेव की कमाई का फॉर्मूला होगा!

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योगगुरु रामदेव की आत्मकथा तेजी से लिखी जा रही है। जिसका टाइटल है- ऑटोबायोग्राफी: बीइंग बाबा रामदेव। योग गुरु की जिंदगी के छिपे राज को किताब के पन्नों में पिरोने का काम कर रहे है वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुलकर। रामदेव की आत्मकथा नए साल में लोगों के हाथों में होगी। इसे छापने का काम पेंगवुइन इंडिया कर रही है।

रामदेव की आत्मकथा में क्या-क्या होगा?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ऑटोबायोग्राफी: बीइंग बाबा रामदेव में योग गुरु के बचपन, शुरुआती जिंदगी और देश के लिए उनकी ओर से चलाए गए सभी आंदोलनों की इनसाइड स्टोरी होगी। आत्मकथा में कई ऐसी बातें भी होंगी, जिसकी जानकारी रामदेव के बहुत करीबी लोगों को भी नहीं है। रामदेव की आत्मकथा जैसे ही प्रेस से बाहर निकलेगी, उससे नया राजनीतिक बवंडर खड़ा होने के पूरे चांस हैं।

रिश्तों के पेंच सुलझाएगी आत्मकथा?

ऑटोबायोग्राफी: बीइंग बाबा रामदेव में उन राजनीतिक रिश्तों का भी जिक्र होगा, जो योगगुरु के लिए अहम रहे हैं। किताब में उस बुरे दौर का भी जिक्र होने की पूरी संभावना है, जिसकी वजह से रामदेव को दिल्ली के रामलीला मैदान से भागना पड़ा था। रामलीला मैदान कांड के बाद से रामदेव की जिंदगी में आए ट्रनिंग प्वाइंट को भी किताब डीकोड करेगी।

बाबा, बिजनेस और पावर पॉलिटिक्स

रामदेव संन्यासी हैं। योग गुरु हैं। उससे भी ज्यादा वो एक सफल कारोबारी है। आज पतंजलि से जुड़ी कंपनियों का कारोबार 5 हजार करोड़ से ज्यादा का है। पतंजलि आयुर्वेद का कारोबार 2012 में 450 करोड़ रु. था, जो 2016 में 5,000 करोड़ पार कर गया। करीब चार साल में ग्यारह गुना बढ़ोत्तरी। बाबा अगले दस साल में इसे एक लाख करोड़ तक पहुंचाने का टारगेट रखे हुए हैं। अपनी आत्मकथा में शायद बाबा उस फॉर्मूले का भी जिक्र करें, जिससे बिजनेस कुछ साल में ही जमीन से उठकर आसमान पर पहुंच जाता है।

रामकिशन के योगगुरु रामदेव बनने की कहानी

हरियाणा के सैदालीपुर में पैदा हुए रामदेव के बचपन का नाम रामकिशन था। बचपन में चेहरे का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। बाद में रामकिशन ने एक साधु से योग की किताब लेकर खुद अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे ठीक हो गए। 1993 में हरिद्वार में गंगा किनारे रामदेव ने दो छात्रों को योग सीखाना शुरू किया। इसी दौर में रामदेव की मुलाकात गुजरात के कोराबारी जिवराज भाई पटेल से हुई और 200 लोगों का पहला योग शिविर लगा। उसके बाद धीरे-धीरे रामदेव चर्चा में आने लगे।

टीवी से मिली राष्ट्रीय पहचान

2001 में संस्कार चैनल पर 20 मिनट का एक योग कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें सुबह-सुबह ही रामदेव नंगे बदन अपनी देह को तोड़ते-मरोड़ते। तरह-तरह के आसन करते। इस शो से रामदेव को राष्ट्रीय पहचान मिली। उसके बाद धीरे-धीरे योग गुरु रामदेव ज्यादातर चैनलों पर दिखने लगे। हिंदुस्तान का बच्चा-बच्चा उन्हें पहचान गया। रामदेव ने 2007 में जब पतंजलि योग पीठ शुरू किया था तो इसके कार्यक्रम में 15 मुख्यमंत्री शामिल हुए थे।

योगगुरु के राजनीतिक दोस्तों की लिस्ट लंबी है। उन्होंने स्वदेशी, भ्रष्टाचार और काला धन के मुद्दे पर हमेशा आवाज उठाई है। शायद, अपनी किताब में योग गुरू रामदेव काला धन और भ्रष्टाचार के मसले पर कुछ गुप्त राज से दुनिया के सामने खोलें।

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