रीता बहुगुणा के कांग्रेस छोड़ने की इनसाइड स्टोरी

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रीता बहुगुणा के कांग्रेस छोड़ने की इनसाइड स्टोरी

यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस को 440 वोल्ट का झटका दे दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलने से रीता बहुगुणा नाराज थी और 24 साल पुराना रिश्ता एक झटके में तोड़ दिया।

बेटे के लिए बीजेपी में शामिल !

  • रीता बहुगुणा उस राजनीतिक परिवार से आती है, जिसे राजनीतिक हवा भांपने में महारत है। रीता फिलहाल लखनऊ कैंट से विधायक हैं। क्षेत्र में उनका काम उनके बेटे मयंक जोशी संभालते हैं। मयंक अब विधानसभा पहुंचने की ख्वाहिश पाले हुए हैं।
  • रीता बहुगुणा 1991 से चुनावी राजनीति में हैं। वो 4 बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। लेकिन, इस बार सूबे में कांग्रेस की हालत पहले से भी पतली है। ऐसे में रीता को लखनऊ कैंट सीट भी हाथ से जाती दिख रही है। क्योंकि, मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी छोटी बहू अपर्णा को लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है।
  • रीता बहुगुणा ने अपने बेटे मयंक को भी बीजेपी ज्वाइन करवाया है। जिससे बीजेपी के टिकट से मयंक जोशी विधानसभा पहुंच सकें और बेटे का राजनीतिक करियर टेकऑफ कर सके।

बहुगुणा ने बिगाड़ा समीकरण

  • रीता बहुगुणा कांग्रेस में एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा थीं। लेकिन, पार्टी ने शीला दीक्षित को यूपी में चेहरा बनाया। जिससे रीता का मन कांग्रेस से खट्टा हो गया और उन्होंने हाथ झटकते हुए कमल पकड़ लिया। इससे यूपी में कांग्रेस के लिए ब्राह्मण वोटरों को खींचने वाला चुंबक कमजोर हुआ है। सूबे में करीब 11% ब्राह्मण वोटर हैं।
  • अब रीता बहुगुणा बीजेपी की नाव पर सवार हैं। ऐसे में बीजेपी का ब्राह्मण वोट बैंक थोड़ा मजबूत होगा। यूपी की राजनीति में बड़ा नाम रहे हेमवती नंदन बहुगुणा की विरासत पर अब बीजेपी हक जताएगी। रीता यूपी के दो बार मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं।
  • रीता बहुगुणा का रोल भले भी यूपी में ज्यादा रहे। लेकिन, असर उत्तराखंड की राजनीति पर भी साफ दिखेगा। क्योंकि, उत्तराखंड के पूर्व सीएम और रीता के भाई विजय बहुगुणा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नए सिरे से उफान मार रही है। ऐसे में कोई बड़ी बात नहीं होगी, जब भाई-बहन मिल कर कांग्रेस के भीतरी राज खोलना शुरू करेंगे।

 

 

 

 

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