‘भाई’ से उलझना ISI चीफ को पड़ा महंगा!

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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर को पैदल करने की इस्लामाबाद में तैयारी हो गयी है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, नए आईएसआई चीफ की तलाश शुरू हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तार नवाज शरीफ सरकार की आंखों में अब क्यों खटक रहे हैं?

वजह नंबर 1

सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई चीफ एक मीटिंग में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई से सीधा उलझ गए। नवाज के भाई शाहबाज शरीफ पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं। वो प्रधानमंत्री के करीबी सलाहकारों में से एक हैं। जब रिजवान अख्तर शाहबाज से बहस कर रहे थे, वहीं नवाज शरीफ भी मौजूद थे। दोनों भाइयों को आईएसआई चीफ के तेवर ठीक नहीं लगे।

वजह नंबर 2

नवाज के भाई शाहबाज का आरोप है कि आईएसआई आतंकियों पर कार्रवाई करने से पुलिस को रोकती है। पुलिस जब कभी आतंकियों को गिरफ्तार करती है तो आईएसआई के अफसर उन्हें आजाद करवा देते हैं। मतलब, पाकिस्तान के पंजाब में आतंकियों को सीधा संरक्षण आईएसआई दे रही है।

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वजह नंबर 3

पिछले 2 साल में आमतौर पर शांत समझे जाने वाले पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आतंकी हमले बढ़े हैं। जिसकी वजह से शाहबाज सरकार पर सवाल उठे। शाहबाज शरीफ को लगता है कि आईएसआई के कारनामों की वजह से ही आतंकी लाहौर और कराची जैसे शहरों को निशाना बना रहे हैं। मतलब, रिजवान अख्तर ने अपना काम ठीक से नहीं किया, जिसका खामियाजा पाकिस्तान भुगत रहा है।

वजह नंबर 4

लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर को सितंबर 2014 में आईएसआई चीफ के पद पर बैठाया गया था। तब आईएसआई कमजोर स्थिति में थी। लेकिन, रिजवान अख्तर ने आईएसआई का पुराना रुतबा हासिल करने के लिए वर्षों से शांत पड़े आतंकी संगठनों को नए सिरे से जिंदा करना शुरू किया। जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने के लिए लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग बढ़ा दी। एक अनुमान के मुताबिक, अलग-अलग रूट से आईएसआई हर साल कश्मीर में आतंकियों को करीब 1200 करोड़ रुपये की फंडिंग कर रही है। नवाज शरीफ सरकार को लगता है कि रिजवान अख्तर ने आईएसआई को मजबूत करने के चक्कर में पूरे पाकिस्तान को खतरे में डाल दिया है।

वजह नंबर 5

लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर के आईएसआई चीफ रहते नवाज सरकार के लिए पीओके में सक्रिय किसी भी बड़े आतंकी संगठन के खिलाफ कार्रवाई करना बहुत मुश्किल होगा। क्योंकि, आतंकियों को नई ताकत रिजवान अख्तर के दौर में ही मिली है। इसीलिए, नवाज सरकार चाह कर भी पिछले दो-ढाई साल में दिखावे के लिए भी हाफिज सईद, मौलाना मसूद अजहर और सैयद सलाउदीन जैसे आतंकियों को पूछताछ के लिए बुलाने का नाटक तक नहीं कर सकी। लेकिन, अब नवाज शरीफ को दुनिया के सामने अपनी चमड़ी बचाने के लिए आतंकियों पर कार्रवाई करनी ही होगी- भले ही वो दिखावे की हो।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्तर को आईएसआई चीफ के पद से हटा कर आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ को भी कमजोर करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। रिजवान अख्तर को आईएसआई चीफ के पद पर बैठाने में सबसे बड़ी भूमिका राहिल शरीफ की थी। फिलहाल, जनरल राहिल शरीफ की स्थिति भी कमजोर हुई है। लेकिन, रिजवान अख्तर को आईएसआई चीफ की कुर्सी से तभी हटाया जा सकता है, जब जनरल राहिल शरीफ भी इसके लिए तैयार होंगे।

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