पांपोर में बार-बार आतंकी हमला क्यों?

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पांपोर में फिर आतंकी हमला

जम्मू-कश्मीर के पांपोर में एनकाउंटर 57 घंटे बाद खत्म हुआ। जेकेईडीआई बिल्डिंग में छिपे दोनों आतंकी मार गिराए गए। कंक्रीट से बनी आलीशान ईडीआई बिल्डिंग में आतंकियों ने किसी सुरक्षित बंकर की तरह पोजिशन ले रखी थी। 7 मंजिल और 70 कमरों वाली इस बिल्डिंग में छिपे आतंकियों को खत्म करने के लिए सेना को 300 से ज्यादा रॉकेट-मोर्टार दागने पड़े। बार-बार रणनीति में बदलाव करना पड़ा।

आतंकियों का टारगेट ईडीआई बिल्डिंग क्यों बनी?

सर्जिकल हमले का बदला लेने के लिए आतंकियों की दो बड़ी कोशिशें नाकाम रहीं। बारामूला में आर्मी कैंप में आतंकी घुस नहीं पाए तो लांगेट कैंप में घुसने की कोशिश कर रहे तीनों आतंकियों को सेना के जवानों ने मार गिराया। ऐसे में आतंकियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए एक ऐसा टॉरगेट चुना, जहां खतरा थोड़ा कम हो और वो देर तक आर्मी को उलझाए रख सकें। आतंकियों ने पांपोर की ईडीआई बिल्डिंग को अपना टारगेट बनाया। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने ईडीआई बिल्डिंग की 4 बार रेकी की। आतंकियों को लगा कि ईडीआई बिल्डिंग में उन्हें कंक्रीट बंकर जैसे सुरक्षा मिलेगी। इतनी बड़ी बिल्डिंग में आतंकी ब्रिगेड आसानी से अपनी पोजिशन बार-बार बदल कर फौज को लंबे समय तक चकमा दे सकेगी।

दो आतंकी मारने में 57 घंटे क्यों लगे?

10 अक्टूबर की सुबह-सुबह ही आतंकी झेलम दरिया के रास्ते ईडीआई बिल्डिंग में दाखिल हुए। बिल्डिंग की सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के पास था। सूत्रों के मुताबिक, बिल्डिंग में दाखिल होने के लिए आतंकियों ने पिछले रास्ते का इस्तेमाल किया। बिल्डिंग में दाखिल होने के बाद आतंकियों ने इंट्री प्वाइंट्स को ब्लॉक कर दिया, जिससे सुरक्षाबलों के जवान भीतर दाखिल न हो सकें। पोजिशन बदल-बदल कर आतंकी फायर करते रहे।

फौज जल्दबाजी में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इस साल फरवरी में भी इसी बिल्डिंग पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सेना के दो अफसर शहीद हुए थे। सेना जल्दबाजी न करते हुए हालात के मुताबिक बार-बार रणनीति बदली। बिल्डिंग के उन हिस्सों पर रॉकेट दागे गए, जिससे आतंकियों की पोजिशन साफ-साफ देखी जा सके। ड्रोन कैमरों के जरिए भी आतंकियों की टोह लेने की लगातार कोशिश चलती रही।

57 घंटे की मुठभेड़ में 300 से ज्यादा रॉकेट और मोर्टार, तीन क्विंटल से ज्यादा प्लास्टिक विस्फोटक, 300 लीटर पेट्रोल-डीजल इस्तेमाल हुआ। एसाल्ट राइफलों और मशीनगन से सैकड़ों राउंड फायर किए गए। आर्मी को वगैर किसी नुकसान के दोनों आतंकियों के मार गिराने में कामयाबी मिली।

पांपोर में बार-बार आतंकी हमला क्यों?

पांपोर झेलम नदी के पूर्वी तट पर बसा इकलौता इलाका है, जो श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे के पास है। पांपोर पूरी दुनिया ने केसर के लिए मशहूर है। श्रीनगर के लालचौक से इसकी दूरी सिर्फ 12 किलोमीटर है तो वहां से त्राल की दूरी करीब 25 किलोमीटर है, जो लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन का गढ़ बन चुका है। ऐसे में आतंकियों के लिए पांपोर पहुंचना आसान है। पांपोर पर हमले से आतंकी हमला नेशनल मीडिया में आ जाता है। लेकिन, सुरक्षाबलों के जवान हमेशा आतंकियों के खौफनाक इरादों को नेस्तनाबूद कर देते हैं।

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