दिल्ली-NCR में सड़कों पर संभल कर निकलें…खतरा है!

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क्या आपको पता है कि दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैंड से गुजरते हुए अनजाने में आपने कितनी सिगरेट का धुआं अपने अंदर खींच लिया? आईटीओ, पंजाबी बाग, एयरपोर्ट, नोएडा, गाजियाबाद की हवा में कितना जहर घुला हुआ है। दिवाली के तीन दिन बाद भी दिल्ली-NCR की हवा में कोई सुधार नहीं हुआ। हवा इतनी जहरीली बन चुकी है कि 50 सिगरेट के बराबर धुआं आपके अंदर जा रहा है, जो आपको लगातार बीमार बना रहा है।

दिल्ली की हवा कितनी जहरीली?

दिल्ली-NCR में कई जगह एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 305 है, जो खतरनाक श्रेणी में है। 0-50 AQI को सेहत के लिए बेहतर और 50-100 AQI को अच्छा माना जाता है।

दिल्ली का आनंद विहार इलाका सबसे ज्यादा प्रदूषित है, वहां AQI 440 मापा गया। पंजाबी बाग में AQI 435 देखा गया। आईटीओ पर AQI 357 तो आरके पुरम में 347 मापा गया। नोएडा में AQI 314 देखा गया। दिल्ली सटे ज्यादातर इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।
प्रदूषण का सेहत पर असर

खतरनाक जहरीली हवा सीधे लोगों के फेफड़ों तक पहुंच रही है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासतौर से नाइट्रोजन डाईऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर अभी कई जगहों पर खतरनाक स्तर पर है।

हवा में नाइट्रोजन डाईऑक्साइड बढ़ने से सांस का सिस्टम गड़बड़ा जाता है। इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। ऐसी जहरीली हवा से फेफड़ों में इनफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कफ, जुकाम और फ्लू जैसी परेशानियां आम बात हैं।

सल्फर डाइऑक्साइड की वजह से नाक और गले में खराबी हो सकती है। इसके अलावा सांस की तकलीफ, सांसों का तेज चलना, सीने में दबाव और दर्द का एहसास हो सकता है।

जहरीली हवा से बचने की सरकारी सलाह

रात 10 बजे से लेकर सुबह 9 बजे के बीच प्रदूषण सबसे अधिक दर्ज किया जा रहा है। सरकार की ओर से सलाह दी गई है कि लोग घरों से बाहर कम से कम निकलें। बाहर निकलें भी तो अच्छी क्वालिटी का मॉस्क पहनकर…घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखें।

कैसे कम होगा दिल्ली की हवा में जहर?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ाने में बड़ा योगदान धूल भरी सड़कों का है। एक रिसर्च के मुताबिक, पीएम 2.5 का 38% हिस्सा सड़क की धूख का होता है। पीएम यानी हवा में घुले जहरीले छोटे कण, जिन्हें नंगी आंखों से देख पाना मुश्किल है। एनवायरनमेंट पल्यूशन (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी ने दिल्ली-NCR में धूल भरी सड़कों की पहचान का फैसला किया है। पहले चरण में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम की तीन-तीन सड़कों की पहचान की जाएगी और धूल कम करने के जरुरी उपाय किए जाएंगे।

सरकार ने प्रदूषण फैलानेवाली रोडवेज बसों पर भी सख्ती करने का फैसला किया है। हर बस अड्डे पर 3-4 टीमें तैनात करने की तैयारी है, जो प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच करेंगी। साथ हार्न बजाने और आवाज लगाकर सवारियां बुलाने पर जुर्माना भी लगाएंगी।

 

 

 

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