‘तीन तलाक’ पर भारत के मुसलमान अलग क्यों हैं?

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तीन तलाक से कब मिलेगी आजादी?

तीन तलाक,  कई विवाह और यूनिफॉर्म सिविल कोड के मसले पर सरकार की ओर से राय मांगे जाने के खिलाफ कई मुस्लिम संगठन भड़क गए हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऐलान किया है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का बायकॉट किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि तीन तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सरकार में तकरार क्यों है?

पहली वजह

सरकार की सोच है कि तीन तलाक कानूनी तौर पर गलत है। वहीं,  पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक को शरिया कानून के हिसाब से सही मानता है।

दूसरी वजह

सरकार का तर्क है कि तीन तलाक समान नागरिक अधिकार के खिलाफ है तो पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान के खिलाफ है।

तीसरी वजह

सरकार का कहना है कि लॉ कमीशन के आधार पर कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया है  तो पर्सनल लॉ बोर्ड का आरोप है कि लॉ कमीशन के सवाल एकतरफा है।

चौथी वजह

सरकार की सोच है कि तीन तलाक की प्रथा महिला सम्मान के खिलाफ है। वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यूनिफॉर्म सिविल पर हस्ताक्षर अभियान चला रहा है। जनमत संग्रह की मांग कर रहा है।

पांचवीं वजह

सरकार चाहती है कि सभी धर्मों का पर्सनल लॉ एक समान हो तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि कुरान शरीफ ही हमारा पर्सनल लॉ है।

अब तक क्यों नहीं लागू हुआ यूनिफॉर्म सिविल कोड?

भारत में मुस्लिमों की आबादी करीब 18 करोड़ है। मुस्लिम वोट बैंक इतना बड़ा और ताकतवर है कि इसे छेड़ने या नाराज करने का खतरा कोई भी राजनीतिक दल नहीं लेना चाहता। इस संगठित वोट बैंक को देखते हुए अब तक कोई भी राजनीतिक दल मुस्लिम संगठनों से सीधा टकराव नहीं चाहता।

शाहबानो केस से सबक

करीब 30 साल पहले मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली पांच बच्चों की मां शाहबानो ने गुजारा भत्ता पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला शाहबानो के हक में गया। इसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कड़ा विरोध किया । बाद में राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिला तलाक पर अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1986 पारित किया, जिसके तहत शाहबानो को तलाक देने वाले उसके शौहर को गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से छूट मिल गयी । उसके बाद किसी नेता या राजनीतिक दल ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मामले में दखल देने की हिम्मत नहीं जुटाई।

 दुनिया के मुस्लिम देशों में तीन तलाक

पाकिस्तान में तलाक प्रक्रिया में सरकारी काउंसिल की भूमिका तय है। मोरक्को जैसे मुस्लिम देशों में तीन तलाक सिर्फ कोर्ट की देखरेख में होता है। अल्जीरिया, ईरान और इंडोनेशिया में तलाक सिर्फ कोर्ट के जरिए संभव है ।

दुनिया भर के मुसलमान वक्त के साथ बदल रहे हैं। लेकिन, भारत के मुसलमान अभी भी बदलाव से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

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