किस नेता से हैं ‘ब्लैक मनी वाले वकील’ रोहित टंडन के रिश्ते? इस खुलासे से बड़ा राजनीतिक भूचाल आने वाला है?

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पिछले हफ्ते दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश 1 के एक दफ्तर में दिल्ली पुलिस ने छापा मारा औऱ अलमारी से 13 करोड़ 65 लाख रुपए बरामद कर लिए। इसमें से 2 करोड़ 60 लाख रुपए के नई करेंसी के नोट थे। ये दफ्तर एक नामी वकील रोहित टंडन की फर्म टी एन्ड टी का है। वैसे तो देश के अलग अलग हिस्सों में इनकम टैक्स और पुलिस के छापों में करोड़ों रुपए बरामद हो रहे हैं लेकिन रोहित टंडन का केस बेहद दिलचस्प है। दिल्ली में सत्ता के गलियारों में इस बरामदगी से हड़कंप है। माना जा रहा है कि इस केस से कुछ ऐसे राज़ खुल सकते हैं जिससे राजनीतिक बवाल खड़ा हो जाए।




कौन हैं रोहित टंडन?

रोहित टंडन पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के बेटे हैं। पिछले साल ही उनके पिता का निधन हुआ है। खबर है कि रोहित टंडन खुद भी पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट के जज बनना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने लॉबीइंग भी की थी। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2014 में रोहित टंडन ने टी एन्ड टी नाम की फर्म खोली। इस कंपनी में उनके अलावा चार औऱ वकील हैं जिनमें उनका बेटा वरुण टंडन भी शामिल है। इस साल 30 सितंबर को रोहित टंडन के वहां छापा पड़ा था। कहा जाता है इसके बाद उन्होंने 125 करोड़ की अघोषित दौलत की बात कबूली। 21 दिन पहले भी दिल्ली पुलिस ने उनके दफ्तर से एक करोड़ 25 लाख रुपए बरामद किए थे।
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किस नेता से हैं रोहित टंडन के संबंध?

कहा जा रहा है कि रोहित टंडन ने पूछताछ में बताया है कि उनके संबंध एक पूर्व केंद्रीय मंत्री औऱ एक बिल्डर से हैं। लेकिन असल में उनका दायरा काफी बड़ा है। कहा जाता है कि रोहित टंडन के संबंध कई नेताओं, बड़े अफसरों औऱ कारोबारियों से हैं। #SachJano की रिसर्च के मुताबिक एक बहुत बड़े बिजनेसमैन के सेकेट्री के साथ मिलकर रोहित टंडन नेताओं औऱ ब्यूरोक्रेट्स के सर्किल में लॉबीइंग का काम करते थे। टंडन को रीयल एस्टेट औऱ कॉर्पोरेट विवादों के निपटारे का माहिर माना जाता है। 2014 में नई कंपनी बनाते वक्त उन्होंने कहा था कि ‘अभी अर्थव्यवस्था बहुत खराब हालत में है। आने वाले समय में तरक्की की काफी गुंजाइश है। इसलिए एक नई फर्म खोलने के लिए ये बहुत अच्छा समय है।‘



इतने छापों के बाद भी क्यों नहीं सुधरे टंडन?

एक बड़ा सवाल ये है कि पिछले तीन महीनों में टंडन पर तीन छापे पड़े। पहली बार में उन्होंने 125 करोड़ की संपत्ती घोषित की और ये बात मीडिया में भी प्रसारित की गयी। फिर नोटबंदी के बाद उनके दफ्तर से सवा करोड़ रुपए मिले। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपने दफ्तर में इतनी बड़ी रकम क्यों छिपाई थी? क्या उन्हें ये इल्म नहीं था कि उनपर फिर छापा पड़ेगा औऱ वो बड़ी मुसीबत में फंसेंगे? इनकम टैक्स के रडार पर होने के बावजूद उन्होंने अपने ऑफिस में इतनी बड़ी रकम रखने की हिम्मत कैसे की?  ये सवाल इस केस में बहुत अहम हैं। आने वाले कुछ दिनों में इनका खुलासा जरूर होगा।

 






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