अखिलेश को मुलायम के घर में नींद क्यों नहीं आ रही?

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अखिलेश को मुलायम के घर में नींद क्यों नहीं आ रही?

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पिछले कुछ दिनों से पिता मुलायम सिंह यादव के घर यानी 5 विक्रमादित्य मार्ग में नींद नहीं आ रही है। मुलायम के घर से सटे 4 विक्रमादित्य मार्ग का बंगला अखिलेश के लिए तैयार है। जल्दी ही अखिलेश नए बंगले में शिफ्ट होने वाले हैं।

दरअसल, पिछले कुछ महीने से समाजवारी परिवार में घमासान मचा हुआ। पहले ये घमासान पार्टी पर वर्चस्व को लेकर चाचा यानी शिवपाल यादव और भतीजा यानी अखिलेश के बीच था। लेकिन, अब पार्टी और सरकार चलाने के तौर-तरीकों को लेकर बाप-बेटे यानी मुलायम और अखिलेश के बीच भी साफ-साफ दिख रहा है।

जब से मुलायम सिंह ने अखिलेश को बिना पूछे ही प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। उन्हें कई फैसलों पर यू-टर्न लेने पर मजबूर कर दिया। इतना ही नहीं जिस अखिलेश की वजह से डॉन मुख्तार अंसारी की पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय टला था, उसे भी शिवपाल ने अब साइकिल पर बैठा लिया। जिस अमर सिंह को बाहरी बता कर पार्टी से बाहर निकालने की बात हो रही थी, उनका मुलायम सिंह यादव ने प्रमोशन कर महासचिव बना दिया। ऐसे में अखिलेश की आंखों से नींद गायब होना स्वभाविक है। छवि को लेकर संजीदा अखिलेश को विधानसभा चुनाव से पहले हर मोड़ पर ठोकर लग रही है।

समाजवादी परिवार में तनातनी की असली वजह दो पीढ़ियों में सोच का है। समाजवादी परिवार की नई पीढ़ी और बुजुर्ग पीढ़ी दोनों ही अपने हिसाब से पार्टी को सत्ता में लाना चाहती है। कई ऐसी वजहें हैं- जहां अखिलेश और मुलायम-शिवपाल की सोच में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है।

पहली वजह

अखिलेश चाहते हैं कि चुनाव सिर्फ उनके चेहरे और विकास के काम पर लड़ा जाए । दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव मानते हैं कि सिर्फ विकास के नाम पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है ।

दूसरी वजह

अखिलेश पार्टी में किसी भी दागी या बाहुबली की एंट्री के बिल्कुल खिलाफ है। वहीं, शिवपाल और मुलायम चुनाव जीतने के लिए दागी, बागी, बाहुबली सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसीलिए, अखिलेश के विरोध के बाद भी मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में जेल काट रहे बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी को भी समाजवादी पार्टी ने टिकट पकड़ा दिया। अमनमणि पर भी अपनी पत्नी की हत्या जैसा संगीन आरोप है, जिसकी सीबीआई जांच की सिफारिश खुद अखिलेश यादव ने की थी।

तीसरी वजह

अखिलेश किसी दूसरी पार्टी से गठबंधन के खिलाफ हैं। शिवपाल और मुलायम छोटी पार्टियों को साथ लेकर चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

चौथी वजह

अखिलेश की अपनी युवा टीम है,  जो सिर्फ उनके इशारे पर काम करती है। वहीं, शिवपाल और मुलायम को लगता है कि उनकी खून-पसीने की मेहनत से खड़ी की गयी पार्टी पर अखिलेश अपनी मर्जी थोप रहे हैं ।

पांचवी वजह

अखिलेश चाहते हैं कि टिकटों का बंटवारा उनकी मर्जी से हो, क्योंकि समाजवादी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा वही हैं। दूसरी ओर, मुलायम और शिवपाल के वफादार हर बार की तरह इस बार भी हावी रहना चाहते हैं।

विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रचंड जीत के लिए अखिलेश भी पूरी ताकत झोंके हुए हैं और मुलायम-शिवपाल भी। लेकिन, समाजवादी परिवार की इस तनातनी में पार्टी कार्यकर्ता दुविधा में हैं कि अखिलेश जिंदाबाद का नारा लगाएं या नेताजी जिंदाबाद का।

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